
ज्योतिर्मठ में भालुओं की बढ़ी दस्तक, मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने को रात में उतरी वन विभाग की टीम
संजय कुंवर, ज्योतिर्मठ। सीमांत नगर ज्योतिर्मठ के आबादी वाले इलाकों के आसपास भालुओं की बढ़ती आवाजाही ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की किसी भी संभावित घटना को रोकने के लिए नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। प्रभावित क्षेत्रों में रात्रि गश्त तेज करने के साथ ही वन विभाग की क्यूआरटी टीम लगातार निगरानी कर रही है।
शनिवार देर शाम से मध्यरात्रि तक उप वन संरक्षक नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क यश ढोबले के नेतृत्व में पार्क की क्यूआरटी टीम ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून के विशेषज्ञों के साथ नगर क्षेत्र के भालू प्रभावित इलाकों का रात्रिकालीन निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने भालुओं की गतिविधियों का अवलोकन किया और उनके आवागमन वाले क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लिया।
रात्रि गश्त के दौरान वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ से जुड़े विशेषज्ञों ने भी प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। टीम ने स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से संवाद कर उन्हें भालुओं से बचाव और मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति जागरूक किया।
इन इलाकों में बढ़ी चिंता
नगर क्षेत्र के गांधीनगर, न्यू रविग्राम, सैन्य क्षेत्र, सुनील-मनोती और औली क्षेत्र में भालुओं की लगातार गतिविधियां सामने आने की सूचना है। आबादी के नजदीक भालुओं की मौजूदगी से स्थानीय लोग खासे परेशान हैं। लोगों का कहना है कि शाम ढलने के बाद इन क्षेत्रों में आवाजाही को लेकर भय बना रहता है।
वन विभाग की टीम भालुओं की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ उनके मूवमेंट वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर रही है। पार्क प्रशासन का प्रयास है कि समय रहते निगरानी और जागरूकता के जरिए मानव-वन्यजीव संघर्ष की किसी भी घटना को टाला जा सके।
QRT टीम को किया गया सक्रिय
डीएफओ यश ढोबले स्वयं क्यूआरटी टीम के साथ दिन-रात क्षेत्र में निगरानी कर रहे हैं। रात्रि गश्त के दौरान भालू की गतिविधियां भी टीम के संज्ञान में आईं। इसके बाद संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और गश्त को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
