छह साल से लंबित मांग को लेकर आंदोलन, 60 से अधिक गांवों के ग्रामीण हुए लामबंद
केएस असवाल
सिमली (चमोली)। सिमली महिला बेस अस्पताल को पूर्ण बेस अस्पताल का दर्जा देने और शासनादेश जारी करने की मांग को लेकर रविवार को ग्रामीण देहरादून के लिए पदयात्रा पर रवाना हुए। ‘बेस नहीं तो वोट नहीं’ के नारे के साथ शुरू हुए आंदोलन में 60 से अधिक गांवों की महिलाओं, युवाओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की।
शनिवार को चंडिका मंदिर परिसर में आयोजित महापंचायत में आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि छह साल से अस्पताल के पूर्ण संचालन की मांग उठाई जा रही है। क्षेत्रीय विधायक अनिल नौटियाल के 15 अगस्त तक शासनादेश जारी करवाने के आश्वासन के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार, विशेषज्ञ चिकित्सकों, जीवनरक्षक उपकरणों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के कारण अस्पताल में पर्याप्त उपचार नहीं मिल पा रहा है। गंभीर मरीजों को ऋषिकेश और देहरादून रेफर करना पड़ता है।
आंदोलन के समर्थन में संघर्ष समिति ने नौ दिनों तक मालई, कफलोड़ी, जखेट, जाख, सुंदरगांव और कोली समेत कई गांवों में जनसंपर्क किया। रविवार को ग्रामीण ढोल-दमांऊ के साथ पदयात्रा पर निकले।
विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल
पदयात्रा में संघर्ष समिति अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी, उपाध्यक्ष भास्करानंद डिमरी, सदस्य जगदीश गैरोला, चमोली प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष उमेश खंडूड़ी, प्रदेश कांग्रेस के मुकेश नेगी, नैनीसैंण ग्राम प्रधान/क्षेत्र पंचायत संगठन के अध्यक्ष रमेश जोशी, कपीरी विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष खिलदेव रावत, गौरव सैनानी संगठन के कर्णप्रयाग ब्लॉक अध्यक्ष महेंद्र सिंह रावत, भाजपा जिला सोशल मीडिया संयोजक राकेश नेगी, भाजपा किसान मोर्चा के ब्लॉक अध्यक्ष संजय कंडवाल और वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता राजेंद्र सगोई सहित अन्य लोग शामिल रहे।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर अस्पताल के लिए शासनादेश जारी कराने तक आंदोलन जारी रहेगा।
