ऊखीमठ : तुंगनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद, इस यात्रा सीजन में 1.97 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

Team PahadRaftar

इस यात्रा सीजन में 1.97 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, चल विग्रह उत्सव डोली प्रथम रात्रि प्रवास के लिए चोपता पहुंची

लक्ष्मण नेगी ऊखीमठ : हिमालय में समुद्रतल से सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट शुक्रवार को दोपहर 12:30 बजे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस पावन अवसर पर 563 श्रद्धालु कपाट बंद होने के साक्षी बने। वहीं, इस यात्रा सीजन में रिकॉर्ड 1,97,424 तीर्थयात्रियों ने भगवान तुंगनाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

कपाट बंद होने से पूर्व ब्रह्म बेला में विद्वान आचार्यों ने भगवान तुंगनाथ का महाभिषेक कर विशेष पूजा-अर्चना और आरती की। इसके बाद मठापति मुकेश मैठाणी की मौजूदगी में भगवान के स्वयंभू शिवलिंग को ब्रह्मकमल, भस्म, चंदन, पुष्प और अक्षत सहित विभिन्न पूजन सामग्रियों से समाधि दी गई। वैदिक मंत्रोच्चार, महिलाओं के मांगल गीतों और स्थानीय वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों के बीच शुभ मुहूर्त में मंदिर के कपाट बंद किए गए।

कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली ने मुख्य मंदिर और सहायक मंदिरों की परिक्रमा की। इसके बाद डोली कैलाश से शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कूमठ के लिए रवाना हुई और सुरम्य बुग्यालों से होते हुए प्रथम रात्रि प्रवास के लिए चोपता पहुंची। यहां देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं, स्थानीय व्यापारियों, जीप-टैक्सी यूनियन और घोड़े-खच्चर संचालकों ने डोली का भव्य स्वागत किया।

शनिवार को डोली विभिन्न यात्रा पड़ावों से होते हुए अंतिम रात्रि प्रवास के लिए भनकुंड पहुंचेगी। आठ नवंबर को भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ में विराजमान होगी। इसके बाद नौ नवंबर से भगवान तुंगनाथ की शीतकालीन पूजा विधिवत शुरू होगी।

मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रागंड ने बताया कि इस वर्ष तुंगनाथ धाम में क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने से यात्रा ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इससे मंदिर समिति की आय में भी वृद्धि हुई है। प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने बताया कि मंदिर समिति के पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार नौटियाल के प्रयासों से जोलीग्रांट, देहरादून के श्रद्धालुओं ने कपाट बंद होने के अवसर पर तुंगनाथ मंदिर को दस क्विंटल फूलों से सजाया था।

इस अवसर पर पूर्व मठापति राम प्रसाद मैठाणी, अतुल मैठाणी, अभिषेक मैठाणी, गीता राम मैठाणी, भरत मैठाणी, वेदपाठी विश्व मोहन जमलोकी, प्रधान सुनीता मैठाणी, विनोद नेगी, चंद्र मोहन बड़वाज, आनंद सिंह रावत, उमेद सिंह नेगी, नरेंद्र भंडारी, जीतपाल भंडारी, अनिल जिरवाण, धीर सिंह नेगी, शिव सिंह रावत, दीपक बमोला, शंकर सिंह नेगी, सतीश पंवार, राहुल नेगी सहित मंदिर समिति के अधिकारी-कर्मचारी, हक-हकूकधारी और सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

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