
अंतिम अरदास और शबद-कीर्तन के बीच शीतकाल के लिए बंद हुए हेमकुंड साहिब व लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट
संजय कुंवर
घांघरिया (चमोली)। सिखों के पवित्र तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब और पौराणिक श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शनिवार को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इसके साथ ही वर्ष 2026 की हेमकुंड साहिब यात्रा का समापन हो गया। इस वर्ष रिकॉर्ड 3,84,500 से अधिक श्रद्धालुओं ने हेमकुंड साहिब पहुंचकर मत्था टेका।

कपाट बंद होने के अवसर पर हेमकुंड साहिब में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया। सुखमणी साहिब के पाठ के बाद शबद-कीर्तन हुआ और दोपहर में अंतिम अरदास की गई। इसके बाद पंज प्यारों की अगुवाई में गुरु ग्रंथ साहिब को दीवान हॉल से सचखंड साहिब में सुशोभित किया गया। इस दौरान सेना के बैंड की धुनों और ‘वाहेगुरु जी’ के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज के समक्ष शीश नवाकर सुख-शांति और लोककल्याण की कामना की।

पाकिस्तान से भी पहुंचा 40 सदस्यीय जत्था
23 मई से शुरू हुई यात्रा के अंतिम दिन गोविंद धाम (घांघरिया) से रागी जत्थे के साथ श्रद्धालु हेमकुंड साहिब पहुंचे। इनमें पाकिस्तान से आया 40 सदस्यीय सिख श्रद्धालुओं का जत्था भी शामिल रहा। करीब 15 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब में बर्फ से आच्छादित पर्वतों के बीच श्रद्धालु गुरु भक्ति में लीन नजर आए।

यात्रा के दौरान दुर्गम पर्वतीय मार्ग और मौसम की चुनौतियों के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र धाम पहुंचकर दर्शन किए। इस वर्ष 3,84,500 से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने से यात्रा ने नया रिकॉर्ड बनाया।
सभी धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के बाद हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। अब शीतकाल के बाद अगले यात्रा सत्र में श्रद्धालु फिर से पवित्र धाम के दर्शन कर सकेंगे।

