ग्लेशियर 10 साल पहले के मुकाबले 65 प्रतिशत ज्यादा तेजी से खो रहे बर्फ, 56 हिमनदीय झीलें बेहद खतरे में
देहरादून, 19 सितंबर। हिमालय केवल देश की प्राकृतिक संपदा ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। देश की 20 प्रतिशत से अधिक आर्थिक गतिविधियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हिमालय पर निर्भर हैं। हिमालयी राज्यों का देश की जीडीपी में प्रत्यक्ष योगदान करीब 4.5 प्रतिशत है, जबकि हिमालय से मिलने वाले जल और प्राकृतिक संसाधनों पर मैदानी क्षेत्रों की कृषि, उद्योग और ऊर्जा उत्पादन भी निर्भर है।

यह तथ्य इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव (आईएमआई) और सिस्टमइक की ओर से तैयार ‘प्रॉस्परस एंड रेजिलिएंट हिमालयाज’ रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार गंगा के मैदानों में गेहूं और धान की खेती, असम और पश्चिम बंगाल में चाय उत्पादन तथा पूर्वोत्तर में बिजली उत्पादन हिमालयी जल और संसाधनों पर निर्भरता के प्रमुख उदाहरण हैं।
65 प्रतिशत अधिक तेजी से बर्फ खो रहे ग्लेशियर
रिपोर्ट में हिमालयी पारिस्थितिकी पर मंडरा रहे खतरे को लेकर चिंता जताई गई है। इसके अनुसार हिमालय के ग्लेशियर करीब 10 वर्ष पहले की तुलना में अब 65 प्रतिशत अधिक तेजी से बर्फ खो रहे हैं। देश में 56 हिमनदीय झीलों को बेहद उच्च खतरे वाली श्रेणी में रखा गया है। ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के बाद आने वाले वर्षों में उनसे मिलने वाले पानी में कमी की आशंका भी जताई गई है।
शनिवार को रिपोर्ट को लेकर आयोजित ऑनलाइन बैठक में हिमालयी राज्यों, पूर्वोत्तर और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े करीब 28 विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सिस्टमइक की निदेशक अरुशी चोपड़ा और दीप्तांशु कोत्रू ने रिपोर्ट के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी।
आपदा आने से पहले तैयारी पर जोर
रिपोर्ट में हिमालयी क्षेत्र में बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं के नुकसान को कम करने के लिए पूर्व तैयारी और बेहतर निगरानी तंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया है। मौसम, नदियों और ग्लेशियरों से संबंधित जानकारी समय पर मिलने से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ ही सड़कों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचे को नुकसान से बचाने के लिए समय रहते कदम उठाए जा सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार हिमालयी क्षेत्र में करीब 40 हजार ग्लेशियर हैं, लेकिन वर्तमान में लगभग 21 ग्लेशियरों की ही नियमित निगरानी हो रही है। ऐसे में निगरानी का दायरा बढ़ाने को महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया गया है।
पर्यटन बढ़े, लेकिन स्थानीय लोगों की आय भी बढ़े
हिमालयी पर्यटन को लेकर भी रिपोर्ट में कई सुझाव दिए गए हैं। हिमालयी क्षेत्र में हर वर्ष करीब 40 करोड़ पर्यटक यात्राएं होती हैं। रिपोर्ट में केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के बजाय ऐसे पर्यटन मॉडल को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई है, जिससे स्थानीय समुदायों की आय बढ़े और पर्यावरण पर दबाव कम हो।
रिपोर्ट में ब्लैक कार्बन उत्सर्जन कम करने, आपदा पूर्व तैयारी मजबूत करने, टिकाऊ बुनियादी ढांचा विकसित करने और स्थानीय समुदाय आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने समेत 10 प्राथमिकताओं पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इन क्षेत्रों में निवेश से प्रत्येक एक रुपये के निवेश पर औसतन करीब आठ रुपये का लाभ मिल सकता है।
अक्टूबर में जारी होगा रिपोर्ट का पूरा संस्करण
रिपोर्ट का विस्तृत संस्करण अक्टूबर में श्रीनगर में आयोजित होने वाले सस्टेनेबल माउंटेन डेवलपमेंट समिट में जारी किया जाएगा। ऑनलाइन बैठक में आईएमआई के अध्यक्ष रमेश नेगी (सेवानिवृत्त आइएएस), सचिव रोशन राय, कोषाध्यक्ष विनिता शाह सहित विभिन्न हिमालयी राज्यों और पूर्वोत्तर के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

