
दशोली-बंड की डोलियां बड़ी जात के तहत जाएंगी होमकुंड, बधाण की डोली लोकजात के तहत वेदनी बुग्याल तक जाएगी
संजय कुंवर
गोपेश्वर। नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से मां नंदा की उत्सव डोलियां शनिवार को कैलास के लिए रवाना होंगी। इस बार दशोली और बंड की नंदा की उत्सव डोलियां व छंतोलियां बड़ी जात के तहत चांसिंग्या खाडू के साथ होमकुंड जाएंगी। वहीं बधाण की नंदा की उत्सव डोली पारंपरिक लोकजात यात्रा के तहत वेदनी बुग्याल तक जाएगी। यात्रा को लेकर क्षेत्र में आस्था और उत्साह का माहौल है।
नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से हर वर्ष अगस्त अथवा सितंबर में मां नंदा की लोकजात यात्रा कैलास के लिए रवाना होती है। दशोली और बंड की उत्सव डोलियां तथा छंतोलियां बालपाटा तक जाती हैं, जबकि बधाण की नंदा की डोली वेदनी बुग्याल तक पहुंचती है। हर 12 वर्ष में नंदा राजजात का आयोजन होता है। इस दौरान नौटी से करीब 280 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर श्रद्धालु होमकुंड पहुंचते हैं। यहां चांसिंग्या खाडू की विदाई के बाद यात्रा वापस लौटती है।
राजजात टलने के बाद बड़ी जात का संकल्प
इस वर्ष नंदा राजजात प्रस्तावित थी, लेकिन धार्मिक कारणों का हवाला देते हुए इसे वर्ष 2027 में आयोजित करने की घोषणा की गई। इसे लेकर विभिन्न पक्षों में मतभेद भी सामने आए हैं। नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ की उपेक्षा का आरोप नंदा राजजात समिति पर लगता रहा है। इसी के चलते कुरूड़ क्षेत्र के लोगों ने इस वर्ष राजजात के बजाय नंदा की बड़ी जात निकालने का संकल्प लिया।
हालांकि हाल में बधाण समिति ने बड़ी जात में शामिल होने से इन्कार कर दिया। ऐसे में अब बड़ी जात में दशोली और बंड की उत्सव डोलियां तथा छंतोलियां शामिल होंगी। दोनों डोलियां चांसिंग्या खाडू के साथ होमकुंड जाएंगी। यहां खाडू की विदाई के बाद दोनों डोलियां अपने-अपने गर्भगृह में प्रतिष्ठापित होंगी।
वहीं बधाण की नंदा की उत्सव डोली लोकजात यात्रा के तहत वेदनी बुग्याल जाएगी। वहां से लौटने के बाद डोली छह माह के प्रवास के लिए देवराड़ा मंदिर में विराजमान होगी।
मौसम की चुनौती के बीच उमड़ेगा आस्था का सैलाब
उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम इन दिनों सामान्य नहीं है। ऐसे में बारिश और खराब मौसम यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए चुनौती बन सकता है। इसके बावजूद मां नंदा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह चरम पर है। बड़ी संख्या में भक्तों के कैलास यात्रा में शामिल होने की उम्मीद है।

