चमोली : वीआरएस के बहाने सियासत में एंट्री? बदरीनाथ में डिमरी बने चर्चा 

Team PahadRaftar

वीआरएस के बहाने सियासत में एंट्री? बदरीनाथ में डिमरी बने चर्चा 

भाजपा-समर्थित छवि के डिमरी की एंट्री से बदरीनाथ में सियासत गरमाई

बदरीनाथ में नया समीकरण! भाजपा-समर्थित छवि वाले कमल किशोर डिमरी (केके डिमरी) के बीआरएस से सियासी हलचल तेज

संतोष सिंह 

गोपेश्वर : बदरीनाथ विधानसभा की राजनीति में अचानक बड़ा मोड़ आ गया है। पूर्व उत्तराखंड शिक्षक संघ अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी के समय से पहले वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) लेने के फैसले ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

अब तक भाजपा में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर आधा दर्जन से अधिक दावेदार अपनी-अपनी सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता के जरिए टिकट की दौड़ में शामिल थे, लेकिन केके डिमरी के इस कदम ने समीकरण बदलने के संकेत दिए हैं। शिक्षा जगत के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका उन्हें एक मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित कर रही है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कमल किशोर डिमरी लंबे समय से भाजपा और संघ विचारधारा के करीब माने जाते रहे हैं। सामाजिक सरोकारों और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रियता को इसी नजरिये से देखा जा रहा है, जिससे उन्हें भाजपा के संभावित चेहरे के रूप में भी चर्चा में लाया जा रहा है।

कमल किशोर डिमरी उत्तराखंड आंदोलन से भी जुड़े रहे हैं। वर्ष 1994 के मुजफ्फरनगर रामपुर तिराहा कांड में वे गोली लगने से घायल हुए थे। इसके अलावा वे 1996 में छात्र संघ अध्यक्ष और 2017 में शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। लंबे समय से जनसरोकारों में सक्रिय रहने के कारण उनकी क्षेत्र में मजबूत पकड़ मानी जाती है।

सूत्रों की मानें तो भाजपा हाईकमान नए चेहरे के रूप में डिमरी पर दांव खेल सकती है। यदि ऐसा होता है तो बदरीनाथ सीट पर मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। वर्तमान में यह सीट कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला के पास है, जिन्हें चुनौती देने के लिए भाजपा मजबूत प्रत्याशी की तलाश में है।

हालांकि, पहाड़ रफ्तार समाचार से बातचीत में कमल किशोर डिमरी ने केवल इतना कहा कि उन्होंने बीआरएस के लिए आवेदन किया है। उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका को लेकर खुलकर कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके इस फैसले को 2027 चुनाव की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

क्या बदलेंगे समीकरण?

डिमरी का वीआरएस लेना सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि बदरीनाथ की राजनीति में संभावित बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा उन्हें टिकट देकर नया दांव खेलती है या फिर अन्य दावेदारों पर भरोसा जताती है।

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