
रुद्रनाथ यात्रा के लिए विकसित हो पीपलकोटी-मठ-बेमरू ट्रैक, स्थानीयों ने उठाई मांग
रुद्रनाथ का वैकल्पिक मार्ग : जहां आस्था, प्रकृति और रोजगार की संभावनाएं साथ-साथ चलती हैं
रिपोर्ट : पीपलकोटी/चमोली
चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं, लेकिन चमोली जनपद में एक ऐसा मार्ग भी है जो अभी पर्यटन के मुख्य मानचित्र पर पूरी तरह नहीं आ पाया है। पीपलकोटी से मठ, बेमरू, तोलीताल और पनार बुग्याल होते हुए चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम तक पहुंचने वाला यह ट्रैक धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और ग्रामीण संस्कृति का अनूठा संगम समेटे हुए है। स्थानीय लोग वर्षों से इस मार्ग को विकसित करने की मांग कर रहे हैं, ताकि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा हों और पलायन पर लगाम लग सके।
मठ गांव : खेती और पशुपालन की मिसाल
बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित पीपलकोटी से करीब पांच किलोमीटर दूर मठ गांव अपनी हरियाली, जल स्रोतों और कृषि उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां के खेतों में आलू, टमाटर, प्याज, शिमला मिर्च, गोभी, बीन्स, खीरा और अन्य कई प्रकार की सब्जियों का उत्पादन होता है। दुग्ध उत्पादन भी ग्रामीणों की आय का प्रमुख स्रोत है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि मठ गांव को पर्यटन विलेज के रूप में विकसित किया जाए तो पर्यटकों को ग्रामीण जीवन की झलक मिलेगी और गांव के युवाओं को घर के आसपास ही रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।
बेमरू : संस्कृति और आस्था का केंद्र
पीपलकोटी से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित बेमरू गांव धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। गांव में मां नंदा देवी और लाटू देवता के मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। यहां प्रतिवर्ष धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं, जिनमें दूर-दराज के लोग भी भाग लेते हैं।
सड़क, विद्यालय, स्वास्थ्य केंद्र और संचार सुविधाओं से युक्त यह गांव पर्यटन विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तोलीताल : प्रकृति का अनछुआ खजाना
बेमरू से आगे बढ़ने पर कनडी नाग ताल और फिर तोलीताल का क्षेत्र शुरू होता है। विशाल घास के मैदानों और घने बांज, बुरांश, मोरू व खर्सू के जंगलों से घिरा तोलीताल प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम उदाहरण है।
आज भी यहां पारंपरिक छानियां मौजूद हैं, जहां कभी स्थानीय पशुपालक अपने पशुओं के साथ महीनों तक निवास करते थे। शांत वातावरण, स्वच्छ जल और चारों ओर फैली हरियाली इस क्षेत्र को ट्रैकिंग और इको-टूरिज्म के लिए उपयुक्त बनाती है।
पनार बुग्याल : धरती पर स्वर्ग का अहसास
तोलीताल से आगे पनार बुग्याल का विस्तृत घास का मैदान पर्यटकों का स्वागत करता है। रंग-बिरंगे फूलों और हिमालयी प्राकृतिक छटा से सजा यह बुग्याल यात्रियों की थकान को पल भर में दूर कर देता है। गर्मियों के दौरान यहां स्थानीय भेड़पालक अपने पशुओं के साथ डेरा डालते हैं, जिससे पर्यटकों को पारंपरिक पहाड़ी जीवन को करीब से देखने का अवसर मिलता है।

रुद्रनाथ तक पहुंचने का रोमांच
पनार बुग्याल से आगे लगभग छह किलोमीटर की दूरी पर चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ का मंदिर स्थित है। हिंदू मान्यता के अनुसार यहां भगवान शिव के मुखारविंद की पूजा होती है। प्राकृतिक गुफाओं, पर्वतीय ढलानों और शांत वातावरण के बीच स्थित यह धाम श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।
रोजगार और पलायन का समाधान बन सकता है यह ट्रैक
मठ गांव के समाजसेवी एवं अधिवक्ता कुलदीप नेगी का कहना है कि यदि सरकार इस मार्ग को पर्यटन और तीर्थाटन सर्किट के रूप में विकसित करे तो स्थानीय युवाओं के लिए होम-स्टे, गाइड, ट्रैकिंग, परिवहन और स्थानीय उत्पादों के विपणन जैसे अनेक अवसर पैदा हो सकते हैं।
वहीं पीपलकोटी के होटल व्यवसायी अतुल शाह बताते हैं कि वर्षों पहले उन्होंने इस मार्ग से पैदल यात्रा कर रुद्रनाथ धाम के दर्शन किए थे। उनके अनुसार यह ट्रैक प्राकृतिक सौंदर्य के मामले में किसी भी प्रसिद्ध हिमालयी ट्रैक से कम नहीं है।
सवाल विकास का
चारधाम यात्रा के बढ़ते दायरे और ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं के बीच पीपलकोटी-मठ-बेमरू-तोलीताल-पनार बुग्याल ट्रैक आज भी व्यापक पहचान का इंतजार कर रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सरकार और पर्यटन विभाग इस दिशा में गंभीर पहल करें तो यह मार्ग न केवल रुद्रनाथ यात्रा का आकर्षक विकल्प बन सकता है, बल्कि चमोली के ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकता है।
आस्था, रोमांच और प्रकृति के इस अनूठे संगम को पहचान और संरक्षण की दरकार है, ताकि हिमालय की गोद में बसे इन गांवों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।
