हेमकुंड : घांघरिया में धीमे नेटवर्क ने बढ़ाई यात्रियों की परेशानी

Team PahadRaftar

डिजिटल भुगतान से लेकर ऑनलाइन टोकन व्यवस्था तक प्रभावित, मजबूत इंटरनेट सेवा की मांग तेज

संजय कुंवर घांघरिया (चमोली)। हेमकुंड साहिब और विश्व धरोहर फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान के बेस कैंप घांघरिया में इन दिनों देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं। यात्रा सीजन के चरम पर पहुंचते ही यहां मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क की सुस्त रफ्तार बड़ी समस्या बन गई है। कमजोर कनेक्टिविटी के कारण डिजिटल भुगतान, वीडियो कॉल, ई-मेल और ईको विकास समिति (ईडीसी) की ऑनलाइन टोकन व्यवस्था बार-बार प्रभावित हो रही है।

व्यापारियों का कहना है कि अधिकांश यात्री गूगल पे, फोनपे और अन्य डिजिटल माध्यमों से भुगतान करते हैं, लेकिन नेटवर्क कमजोर होने के कारण भुगतान का संदेश समय पर नहीं मिलता। कई बार ट्रांजेक्शन का कन्फर्मेशन घंटों बाद और कुछ मामलों में कई दिन बाद प्राप्त होता है। इससे व्यापारियों और यात्रियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी रहती है।

ईको विकास समिति भ्यूंडार के अध्यक्ष प्रवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि क्षेत्र में जियो और एयरटेल के टावर लगे होने के बावजूद इंटरनेट सेवा बेहद धीमी है। इसका सीधा असर घोड़ा-खच्चर, डंडी-कंडी और पालकी संचालन के लिए जारी होने वाले ऑनलाइन टोकनों पर पड़ रहा है। कई बार नेटवर्क बाधित होने से टोकन जारी करने की प्रक्रिया रुक जाती है, जिससे यात्रियों और संचालकों दोनों को परेशानी झेलनी पड़ती है।

उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे घांघरिया में यात्रियों की संख्या बढ़ती है, नेटवर्क की गति और धीमी हो जाती है। मोबाइल पर सामान्य बातचीत तो हो जाती है, लेकिन डिजिटल भुगतान, वीडियो कॉल और अन्य ऑनलाइन सेवाएं अक्सर ठप पड़ जाती हैं।

पूर्व ग्राम प्रधान भ्यूंडार एवं नंदा लोकपाल होटल के संचालक डी.एस. चौहान ने कहा कि डिजिटल इंडिया के दौर में अधिकांश यात्री नकदी के बजाय ऑनलाइन भुगतान को प्राथमिकता दे रहे हैं। यात्री क्षेत्र में एटीएम की सुविधा की मांग भी कर रहे हैं, लेकिन कमजोर नेटवर्क के कारण ऐसी सुविधाओं का संचालन भी चुनौती बना हुआ है।

स्थानीय व्यापारियों, होटल संचालकों और सामाजिक संगठनों ने दूरसंचार कंपनियों और प्रशासन से घांघरिया में मोबाइल नेटवर्क और हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा को तत्काल मजबूत करने की मांग की है, ताकि हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी आने वाले लाखों श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बेहतर संचार सुविधाएं मिल सकें।

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