
एमएल पब्लिक स्कूल के छात्रों ने कार्तिक स्वामी तीर्थ में किया शैक्षणिक भ्रमण

लक्ष्मण नेगी
ऊखीमठ : एमएल. पब्लिक स्कूल नाला, गुप्तकाशी के 70 सदस्यीय छात्र-छात्राओं के दल ने शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल कार्तिक स्वामी तीर्थ के दर्शन किए। इस दौरान छात्रों ने न केवल भगवान कार्तिकेय के पावन धाम में पूजा-अर्चना कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की, बल्कि हिमालय की गोद में बसे इस तीर्थ क्षेत्र के अनुपम प्राकृतिक सौन्दर्य से भी रूबरू हुए। विद्यालय प्रबंधन द्वारा आयोजित इस शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य छात्रों को पाठ्य पुस्तकों से इतर प्रकृति, संस्कृति, इतिहास एवं धार्मिक धरोहरों से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना था। भ्रमण के दौरान छात्रों ने कार्तिक स्वामी मंदिर तक पहुंचने वाले पैदल मार्ग, चारों ओर फैली हरी-भरी वनस्पति, हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं तथा दूर-दूर तक दिखाई देने वाले मनोरम दृश्य का अवलोकन किया। स्वच्छ वातावरण और शांत प्रकृति ने छात्रों को विशेष रूप से आकर्षित किया।
भ्रमण दल को कार्तिक स्वामी तीर्थ के पुजारी ने नन्दूपुरी कार्तिक स्वामी तीर्थ के धार्मिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह तीर्थ भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है और यहां से सूर्योदय व सूर्यास्त का दृश्य अत्यंत मनोहारी दिखाई देता है। छात्रों ने इस जानकारी को बड़े उत्साह से सुना और कई जिज्ञासापूर्ण प्रश्न भी पूछे।
विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रदीप सेमवाल ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण छात्रों के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं। इससे छात्रों में प्रकृति संरक्षण, सांस्कृतिक मूल्यों तथा अनुशासन की भावना विकसित होती है। वहीं छात्रों ने भी इस यात्रा को ज्ञानवर्धक, रोमांचक एवं अविस्मरणीय अनुभव बताते हुए विद्यालय प्रबंधन व शिक्षकों का आभार व्यक्त किया। शैक्षणिक भ्रमण के समापन पर सभी छात्र सुरक्षित रूप से विद्यालय लौटे। इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण आयोजित करने की बात कही, ताकि छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान के साथ-साथ प्रकृति और संस्कृति से जोड़ने का अवसर मिलता रहे। इस मौके पर प्रियदीप सिंह नेगी , जसवन्त सिंह पुण्डीर, दीपक सती , प्रवीण बिष्ट, देव नेगी , प्रियांशी शर्मा , मेदनीधर, रवीन्द्र कुमार, पुष्कर सिंह सहित 30 छात्र व 32 छात्राएं मौजूद रहे ।
