जोशीमठ : संस्कृति, जैव विविधता और अल्पाइन पुष्पों की घाटी ये तीन विश्व धरोहरों को संजोए हुए है ज्योतिर्मठ

Team PahadRaftar

संस्कृति, जैव विविधता और अल्पाइन पुष्पों की घाटी ये तीन विश्व धरोहरों को संजोए हुए है ज्योतिर्मठ

संजय कुंवर,जोशीमठ

चमोली : उत्तराखंड का ज्योतिर्मठ क्षेत्र तीन विश्व धरोहर को अपने में संजोए हुए है। विश्व सांस्कृतिक धरोहर रम्माण उत्सव सहित विश्व प्राकृतिक धरोहर स्थल फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क और नन्दा देवी राष्ट्रीय पार्क दो महत्व पूर्ण वर्ल्ड नेचुरल हेरिटेज साईट जोशीमठ क्षेत्र में है।

जहां विश्व सांस्कृतिक धरोहर रम्माण मेला महा ग्रंथ रामायण पर ढोल दमाऊं की 18 तालों पर दी जाने वाली मनमोहक प्रस्तुति वाली पौराणिक नृत्य नाटिका को मुखोटों के जरिए प्रदर्शित करता है, इसी कारण इसे विश्व सांस्कृतिक धरोहर की सूची वर्ष 2009 में शामिल किया गया, तो वहीं नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क अपने दुर्लभ फ्लोरा फ्यूना के साथ-साथ अनूठी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। जिसे वर्ष 1982 में राष्ट्रीय पार्क घोषित किया गया था, इसके 6वर्षो के बाद 1988 में इसे यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साईट घोषित किया गया था। वही फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान प्राकृतिक रंग बिरंगी अल्पाइन पुष्पों की प्रजातियों के अपने प्राकृतिक आवास के लिए प्रसिद्ध है। जिसे सबसे पहले 1932 में ब्रिटिश पर्वतारोही और वनस्पति विज्ञानी फ्रैंक स्मिथ ने अपने कामेट पर्वत आरोहण के दौरान खोजा था, जिसे वर्ष 2005 में यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साईट का दर्जा मिला, चमोली जनपद के जोशीमठ क्षेत्र की ये तीनों विश्व धरोहर आज प्रकृति प्रेमियों, पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों के लिए त्रिवेणी साबित हो रही है।

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