
सिंह द्वार से मंदिर परिसर तक गेंदे और चंपा-चमेली के पुष्पों से हुआ भव्य श्रृंगार, कड़ाके की ठंड पर भारी पड़ी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था
संजय कुंवर, बदरीनाथ धाम
भू-बैकुंठ नगरी श्री बदरीनाथ धाम में शरद पूर्णिमा के पावन पर्व पर भगवान बदरी विशाल के मंदिर को गेंदे, चंपा और चमेली सहित विभिन्न पुष्पों से भव्य रूप में सजाया गया। पुष्पों से सजे मंदिर की अलौकिक छटा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर के सिंह द्वार से लेकर पूरे परिसर तक की गई फूलों की सजावट ने धाम की भव्यता और दिव्यता को और निखार दिया है।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के सूत्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर की यह विशेष पुष्प सजावट उज्जैन के एक दानदाता की ओर से कराई गई है। रंग-बिरंगे फूलों की लड़ियों से सजे सिंह द्वार और मंदिर परिसर की अनुपम छटा को निहारने के लिए श्रद्धालु ठिठुरन के बीच भी ठहरते नजर आए। कई तीर्थयात्री मंदिर के मनोहारी स्वरूप को एकटक निहारते रहे।
धाम में मौसम लगातार सर्द बना हुआ है। बर्फीली हवाओं के बीच तापमान में गिरावट के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था में कोई कमी नहीं दिखाई दी। ठंड की परवाह किए बिना तीर्थयात्री भगवान बदरी विशाल के दर्शन के साथ मंदिर के भव्य पुष्प श्रृंगार को अपने मन में संजोते नजर आए। फूलों से सजे मंदिर की सुंदरता ने शरद पूर्णिमा के धार्मिक उल्लास को और खास बना दिया।
शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसी कारण इस पर्व को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। देशभर में श्रद्धालु इस दिन पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करते हैं। भगवान बदरी विशाल के धाम में भी शरद पूर्णिमा पर भक्ति, आस्था और दिव्यता का अनूठा संगम देखने को मिला।
