चमोली : जब शिक्षक ने बच्चों के हाथों में किताबों के साथ सौंप दी हरियाली

Team PahadRaftar

मेरा विद्यालय, मेरा पेड़ मुहिम से शिक्षा को मिला पर्यावरण संरक्षण का संदेश

मनोज सती पिछले 10 वर्षों से बांट रहे निःशुल्क पौधे, अब तक 200 से अधिक छात्र-छात्राओं तक पहुंची पहल

पहाड़ रफ्तार

चमोली : कक्षा में पढ़ाया गया पाठ अक्सर परीक्षा तक याद रहता है, लेकिन जीवन से जुड़ी सीख उम्रभर साथ चलती है। चमोली में शिक्षक एवं पर्यावरण प्रेमी मनोज सती बच्चों को ऐसी ही सीख दे रहे हैं—किताबों के साथ पेड़ों का महत्व समझने की सीख। उनकी पहल ‘मेरा विद्यालय, मेरा पेड़’ अब केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर हरियाली, जिम्मेदारी और भविष्य के प्रति संवेदनशीलता बोने वाली प्रेरक मुहिम बन चुकी है।

मनोज सती पिछले 10 वर्षों से अपनी निजी नर्सरी से निःशुल्क पौधों का वितरण करते आ रहे हैं। उनका विश्वास है कि यदि बचपन में ही बच्चों को प्रकृति से जोड़ दिया जाए, तो वे बड़े होकर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनेंगे। इसी सोच को उन्होंने वर्ष 2017 से ‘मेरा विद्यालय, मेरा पेड़’ अभियान के रूप में व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया।

इस अभियान के तहत हर वर्ष अगली कक्षा में प्रवेश करने वाले छात्र-छात्राओं को पौधे भेंट किए जाते हैं। इसका मकसद केवल पौधा बांटना नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर यह भावना जगाना है कि जिस तरह वे अपनी पढ़ाई और भविष्य को संवारते हैं, उसी तरह प्रकृति को भी सहेजना उनकी जिम्मेदारी है। अब तक इस अभियान के माध्यम से 200 से अधिक निःशुल्क पौधों का वितरण किया जा चुका है।

इसी क्रम में मंगलवार को राजकीय जूनियर हाईस्कूल दूसातगांव में ‘मेरा विद्यालय, मेरा पेड़’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान आठवीं उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को फलदार पौधे वितरित किए गए। बच्चों ने इन पौधों को अपने घर, आंगन और खेतों के आसपास लगाने का संकल्प लिया।

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि ये पौधे बच्चों के लिए केवल हरियाली नहीं, बल्कि उनकी स्कूली यादों, मेहनत और बचपन की निशानी भी बन जाते हैं। जब ये पौधे समय के साथ पेड़ बनते हैं, तो बच्चों के भीतर भी प्रकृति के प्रति जुड़ाव, अपनापन और संरक्षण की चेतना मजबूत होती जाती है।

आज जब जलवायु परिवर्तन, घटते वन क्षेत्र और पर्यावरण असंतुलन पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं, ऐसे दौर में एक शिक्षक की यह छोटी-सी पहल बड़े सामाजिक संदेश के रूप में सामने आती है। यह मुहिम साफ बताती है कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी सिखाने का माध्यम भी है।

मनोज सती की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि शिक्षक चाहें तो वे बच्चों के हाथों में सिर्फ किताबें ही नहीं, बल्कि आने वाले कल की हरियाली भी सौंप सकते हैं।

इस अवसर पर प्रधानाध्यापिका आभा सैलानी, सहायक अध्यापिका दमयंती बड़वाल, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष संदीप गडिया सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

Next Post

चमोली : चोरी के जेवर बेच खरीदी बाइक, बाकी माल बेचने जा रहा था देहरादून

गौचर में सूने मकान में सेंधमारी का खुलासा, आरोपी गिरफ्तार  केएस असवाल  गौचर / चमोली : गौचर क्षेत्र में सूने मकान में सेंधमारी कर लाखों रुपये के जेवरात, मोबाइल और स्मार्ट वॉच चोरी करने वाले आरोपी को कर्णप्रयाग पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी चोरी के कुछ जेवर बेचकर […]

You May Like