
डायट चमोली के पांच दिवसीय शिविर में 140 विद्यार्थियों ने सीखे सुंदर लेखन के गुर, विशेषज्ञों ने बताया—अच्छी लिखावट आत्मविश्वास की पहचान
केएस असवाल गौचर। आज के डिजिटल दौर में जहां मोबाइल और कंप्यूटर पर टाइपिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है, वहीं सुंदर हस्तलेखन की अहमियत कम नहीं हुई है। प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर विद्यालयी शिक्षा तक साफ-सुथरी और प्रभावशाली लिखावट आज भी सफलता का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है। इसी सोच के साथ जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) चमोली ने पांच दिवसीय समर कैंप एवं हस्तलेखन कार्यशाला का आयोजन किया, जिसका सोमवार को समापन हो गया।

कार्यशाला में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के लगभग 140 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। शिविर का उद्देश्य बच्चों के हस्तलेखन में सुधार, लेखन कौशल का विकास और उनमें आत्मविश्वास का संचार करना था। पांच दिनों तक विद्यार्थियों ने सुंदर, स्पष्ट और प्रभावशाली लेखन की बारीकियां सीखीं तथा नियमित अभ्यास के माध्यम से अपनी लिखावट में उल्लेखनीय सुधार किया।
इस बार कार्यशाला का मुख्य आकर्षण राजकीय जूनियर हाईस्कूल करूली (बागेश्वर) के प्रधानाध्यापक नरेंद्र गिरि गोस्वामी रहे। उन्होंने बच्चों को हस्तलेखन सुधारने की व्यावहारिक तकनीकें सिखाईं। उनके साथ विद्यालय के छात्र-छात्राओं दीक्षित, योगेश, बबलू बिष्ट, दीक्षा, लता और भूमिका ने भी अपने अनुभव साझा कर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
समापन समारोह में डायट के प्राचार्य आकाश सारस्वत ने कहा कि सुंदर हस्तलेखन केवल अक्षरों को व्यवस्थित लिखने की कला नहीं, बल्कि विद्यार्थी के व्यक्तित्व और अनुशासन का भी परिचायक है। उनका कहना था कि अच्छी लिखावट बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाती है और उनकी अभिव्यक्ति को प्रभावी बनाती है।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. कमलेश कुमार मिश्र ने बताया कि यह लगातार चौथा समर कैंप है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और स्थानीय क्षेत्र के कक्षा चार से नौ तक के विद्यार्थियों को छुट्टियों के दौरान रचनात्मक एवं शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि अगला समर कैंप जनवरी माह में आयोजित किया जाएगा।
कार्यशाला में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज गौचर, राजकीय इंटर कॉलेज गौचर, केंद्रीय विद्यालय आईटीबीपी गौचर, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सरस्वती शिशु मंदिर, संस्कार द सेकेंडरी स्कूल, शिवालिक पब्लिक स्कूल, केशवाज बॉयज स्कूल, कॉन्वेंट स्कूल नगरासू तथा द इंडियन एकेडमी कर्णप्रयाग के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
समापन अवसर पर केंद्रीय विद्यालय आईटीबीपी गौचर के प्रधानाचार्य संदीप त्यागी ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण बच्चों की बौद्धिक क्षमता के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में डायट के वरिष्ठ संकाय सदस्य वीरेंद्र सिंह कठैत, बच्चन जितेला, नीतू सूद, गोपाल कपरुवाण सहित बड़ी संख्या में अभिभावक और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
सवाल यह भी…
डिजिटल युग में जहां हस्तलेखन की आदत लगातार कमजोर पड़ रही है, ऐसे में क्या विद्यालय स्तर पर इस तरह के प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए? डायट चमोली की यह पहल इस दिशा में एक सकारात्मक प्रयास मानी जा रही है।
