
महिलाएं हुईं मुखर : शराब नहीं, संस्कार चाहिए – गांव में बड़ा फैसला
नशे पर गांव की लक्ष्मण रेखा, गंगोलगांव में शराब पीना हुआ अपराध
गांव की बैठक में लिया बड़ा फैसला – शराब पीने-पिलाने पर रोक, उल्लंघन पर 21 हजार जुर्माना
गोपेश्वर : शराब के बढ़ते दुष्प्रभाव और उससे टूटते परिवारों को बचाने के लिए गंगोलगांव की महिलाओं ने बड़ा कदम उठाया है। जिला मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित गंगोलगांव में महिलाओं के नेतृत्व में गांव को नशा मुक्त बनाने के उद्देश्य से शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।

रविवार को गांव में आयोजित बैठक में महिला मंगल दल अध्यक्ष कविता भंडारी और सभासद सुशीला देवी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया। बैठक में “नशा मुक्त हो गांव हमारा” का संकल्प लेते हुए सामाजिक, धार्मिक और अन्य सभी कार्यक्रमों में शराब के सेवन और परोसने पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया गया।
महिलाओं ने सख्त रुख अपनाते हुए गांव में शराब पीने, पिलाने या बाहर से शराब पीकर आने पर 21 हजार रुपये का जुर्माना तय किया है। इसके साथ ही गांव के दुकानदारों को भी युवाओं को किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ बेचने पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
महिला मंगल दल अध्यक्ष कविता भंडारी ने कहा कि शराब की लत के कारण सबसे ज्यादा युवा प्रभावित हो रहे हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। वहीं सभासद सुशीला देवी ने कहा कि शराब के कारण परिवारों में आए दिन झगड़े और कलह बढ़ रहे हैं, जिससे कई परिवार टूटने की कगार पर हैं।
उन्होंने कहा कि गांव को नशा मुक्त बनाने के लिए महिलाओं ने अब ठोस कदम उठाया है और इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी ग्रामीणों का सहयोग मिल रहा है।
ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया है। बैठक में राम सिंह राणा, हरीश रावत, महेंद्र राणा, बलवंत राणा, गजेंद्र रावत, कुलदीप बिष्ट, पुष्कर बिष्ट, मनीष, पंचम बिष्ट, अंजना, प्रेमा देवी, पुष्पा देवी शामिल समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
