
जल-जंगल-जमीन, पलायन और गैरसैंण राजधानी के मुद्दों पर मंथन
लक्ष्मण नेगी
ऊखीमठ : उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) की केन्द्रीय कार्य समिति की महत्वपूर्ण चिंतन बैठक स्यालसौड़ में आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों—जल, जंगल, जमीन, पलायन, बेरोजगारी तथा स्थायी राजधानी गैरसैंण—पर व्यापक चर्चा करते हुए भविष्य की रणनीति तय की गई।
बैठक में मौजूद केन्द्रीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कहा कि राज्य गठन के मूल उद्देश्य आज भी अधूरे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से सत्ता में रही सरकारें प्रदेश के संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं कर सकीं, जिससे आम जनता को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।
चिंतन बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उक्रांद नेताओं ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा से है, लेकिन अनियोजित विकास और अतिक्रमण के कारण पर्यावरणीय संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। साथ ही युवाओं का पलायन और बढ़ती बेरोजगारी भी गंभीर चिंता का विषय बताया गया।
स्थायी राजधानी के मुद्दे पर दल ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा। नेताओं ने कहा कि गैरसैंण भौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टि से उपयुक्त राजधानी है और इससे जुड़ी जनता की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
उक्रांद ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि पार्टी प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी। साथ ही संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और जनसंपर्क अभियान तेज करने की रणनीति पर भी जोर दिया गया। नेताओं ने कहा कि क्षेत्रीय दल ही उत्तराखंड के हितों की सच्ची आवाज बन सकता है।
बैठक में केंद्रीय अध्यक्ष सुरेन्द्र कुकरेती, पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी, पुष्पेश त्रिपाठी, पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष पूरण सिंह कठैत, कार्यकारी अध्यक्ष पंकज ब्यास, सुशील उनियाल, गणेश काला, आशुतोष नेगी, किरन रावत, श्रीमती रेखा, श्रीमती रमा चौहान, रुद्रप्रयाग जिलाध्यक्ष बलवीर चौधरी, कार्यक्रम संयोजक देवेन्द्र चमोली और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी आशुतोष भण्डारी सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

