संजय कुंवर, नीति पास, चमोली। केंद्र सरकार की पहल पर चमोली जिले के सीमांत नीति-माणा क्षेत्र में सीमा दर्शन कार्यक्रम के तहत धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को खोले जाने के बाद सरहदी इलाकों में रौनक लौटने लगी है। इसी क्रम में नीति घाटी के ऋतु प्रवासी गांवों से 15 सदस्यीय आध्यात्मिक तीर्थाटन दल ने नीति पास बॉर्डर क्षेत्र का भ्रमण किया और सीमा की निगरानी कर रहे सेना के जवानों का उत्साहवर्धन किया।

डॉ. मान सिंह राणा के सहयोग से राजेंद्र सिंह राणा, बाल सिंह राणा, निर्मला देवी, शुक्रि देवी, राजेश्वरी देवी समेत दल के सदस्यों ने नीति पास क्षेत्र के ऐतिहासिक केलांग मंडी और गोटिंग तक सीमा दर्शन किया। बॉर्डर पोस्ट पर पहुंचने पर दल ने भारत माता की जय के उद्घोष और जयकारों के साथ देश की सरहद की रक्षा में तैनात जवानों का अभिवादन किया। सेना के जवानों और अधिकारियों ने भी सीमांत क्षेत्र से पहुंचे दल का गर्मजोशी से स्वागत किया।

इस दौरान नीति घाटी की मातृशक्ति ने जवानों और अधिकारियों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी दीर्घायु और सुरक्षित सेवा की कामना की। उर्मिला देवी, निर्मला, ममता, बिच्छा, राजेश्वरी, सुशीला, मंग्गी, बिद्दी और झांप्पी देवी समेत महिलाओं ने भारत माता की जय के उद्घोष के बीच जवानों का मनोबल बढ़ाया।
पारंपरिक लोक संस्कृति ने बांधा समां
सीमा दर्शन के दौरान नीति घाटी की मातृशक्ति पारंपरिक वेशभूषा में नजर आई। महिलाओं ने सामूहिक रूप से झुमैलो और चांचरी लोकगीतों के साथ पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। इससे सीमांत क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति और विरासत की झलक देखने को मिली। महिलाओं ने कहा कि उनकी संस्कृति और परंपराएं पीढ़ियों से संरक्षित हैं और ऐसे आयोजनों के माध्यम से इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।
सीमांत पर्यटन को मिल रहा बढ़ावा
नीति पास, माणा पास और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में सीमा दर्शन कार्यक्रम के तहत पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय लोगों में भी उत्साह है। लफतल, बड़ाहोती, सुमना, पार्वती कुंड, गणेश गंगा, माणा पास, गोटिंग, देवताल और घसतोली जैसे सीमांत क्षेत्र अब पर्यटकों और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।
धार्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन और वाइब्रेंट विलेज टूरिज्म के माध्यम से इन क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत को पहचान मिल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमा से जुड़े इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से सीमांत गांवों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

