
बूरा गांव में उमड़ा जनसैलाब, छात्र-छात्राएं रोते हुए बोले – ऐसे गुरुजी फिर नहीं मिलेंगे!
नंदानगर (चमोली) : सीमांत क्षेत्र नंदानगर ब्लॉक के सुदूरवर्ती ग्रामसभा बूरा में एक शिक्षक की विदाई ने हर किसी को भावुक कर दिया। राजकीय प्राथमिक विद्यालय बूरा के प्रधानाध्यापक नरेंद्र सिंह चौहान के पदोन्नति के बाद तबादले पर आयोजित विदाई समारोह में पूरा गांव उमड़ पड़ा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर किसी की आंखें नम नजर आईं।

सबसे ज्यादा भावुक दृश्य तब देखने को मिला, जब स्कूल के छात्र-छात्राएं अपने गुरुजी से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़े। बच्चों का कहना था कि “ऐसे गुरुजी अब फिर नहीं मिलेंगे।” माहौल इतना भावुक था कि हर किसी की आंखें नम हो गईं।
ग्रामीणों ने अपने प्रिय शिक्षक को फूल-मालाओं से लाद दिया और ढोल-दमाऊं, बैंड-बाजे के साथ घोड़े पर बैठाकर पूरे गांव में सम्मानपूर्वक विदाई दी। यह नजारा किसी उत्सव से कम नहीं था, लेकिन इसमें बिछड़ने का दर्द साफ झलक रहा था।
ग्रामीणों के अनुसार नरेंद्र सिंह चौहान ने अपने कार्यकाल में विद्यालय की तस्वीर बदल दी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में आगे बढ़ाया। उन्होंने छात्रों में आत्मविश्वास जगाया और उन्हें सिखाया कि असफलता से सीखकर आगे बढ़ना चाहिए।
सहयोगी शिक्षकों ने बताया कि चौहान की कार्यशैली प्रेरणादायक रही। उन्होंने हमेशा टीम भावना के साथ काम किया और हर किसी को साथ लेकर चले।
विदाई के दौरान भावुक हुए नरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि यह प्यार और सम्मान उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों और बच्चों का यह स्नेह उन्हें नए कार्यस्थल पर बेहतर काम करने की प्रेरणा देगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के दौर में किसी शिक्षक के प्रति इतना गहरा लगाव कम ही देखने को मिलता है। चौहान ने अपने समर्पण से ‘दुर्गम’ क्षेत्र में शिक्षा की नई मिसाल पेश की है।

