
अर्जित अवकाश’ पर हरदा ने दी सफाई, बोले- पार्टी का सिपाही हूं, फैसला हमेशा शिरोधार्य
59 साल की राजनीति के बाद विराम पर हरदा की सफाई
2027 पर हरदा का संकेत, बोले- नौजवानों के लिए हमेशा उपलब्ध हूं
देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में अपने ‘अर्जित अवकाश’ को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री Harish Rawat ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि 59 वर्षों से अधिक के लंबे राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में लगातार सक्रिय रहने के बाद थोड़ा अवकाश लेना उनका स्वाभाविक अधिकार है और इसे लेकर पक्ष-विपक्ष खड़ा नहीं किया जाना चाहिए।
हरदा ने कहा कि उनके इस निर्णय को लेकर कुछ लोगों की भावनाएं स्वाभाविक हो सकती हैं। उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता Govind Singh Kunjwal का जिक्र करते हुए कहा कि उनसे उनका लंबा मानसिक और भावनात्मक संबंध रहा है, इसलिए उनके शब्द भी स्वाभाविक हैं। साथ ही उन्होंने उन लोगों से भी माफी मांगी, जिन्होंने उन्हें भाई या पिता समान मानकर भावनात्मक प्रतिक्रिया दी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ किया कि अपने पूरे राजनीतिक जीवन में उन्होंने खुद को पार्टी का कार्यकर्ता माना है और हमेशा शीर्ष नेतृत्व के फैसले को ही अंतिम माना है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी अपनी बात रखी होगी, मगर अंततः पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व के निर्णय को ही शिरोधार्य किया है।
हरदा ने अपने बयान में 2027 की राजनीति की ओर भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि जिन नौजवानों को 2027 में अपने लिए संभावनाएं दिखाई दे रही हैं, उन्हें वह यह कहना चाहते हैं कि यदि जरूरत पड़ी तो वह “महर्षि दधीचि की तरह अपनी हड्डियां तक” उनके भविष्य को संवारने के लिए समर्पित कर देंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अवकाश के दौरान भी वह पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हैं, बल्कि लगातार सक्रिय हैं। समाज, क्षेत्रों, समूहों और जन अपेक्षाओं से अपने लंबे जुड़ाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस पड़ाव पर उन्हें लोगों के परामर्श और उनके बीच जाने की आवश्यकता महसूस हो रही है।
हरदा के इस बयान के बाद साफ माना जा रहा है कि उन्होंने राजनीति से दूरी की अटकलों को विराम देने के साथ-साथ कांग्रेस के भीतर यह संदेश भी दे दिया है कि वह अभी भी सक्रिय भूमिका में हैं और आने वाले चुनावी समीकरणों में उनकी मौजूदगी बनी रहेगी।

