पोखरी में कांग्रेस की किलाबंदी, कई प्रभावशाली चेहरे पार्टी में शामिल
लखपत बुटोला की मौजूदगी में बढ़ा कुनबा, 2027 की तैयारी का संकेत

पोखरी। बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में कांग्रेस ने पोखरी नगर क्षेत्र से एक बड़ा चुनावी संदेश देने की कोशिश की है। विधायक लखपत बुटोला की मौजूदगी में आयोजित पोखरी नगर कांग्रेस की बैठक में कई प्रभावशाली और सामाजिक रूप से सक्रिय लोगों के कांग्रेस में शामिल होने को 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
बैठक में नगर पंचायत अध्यक्ष पद के प्रत्याशी रहे राजेंद्र कोठियाल, सिताबू लाल आर्य, धीरेंद्र रावत, कैप्टन तेजपाल बर्तवाल, इंस्पेक्टर राघवानंद डंगवाल, पूर्व पार्षद सुरजी देवी और इंस्पेक्टर जसपाल लाल समेत बड़ी संख्या में लोगों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। स्थानीय राजनीति में इन चेहरों की अपनी पहचान और प्रभाव माना जाता है, ऐसे में इनके शामिल होने से कांग्रेस ने नगर क्षेत्र में अपनी संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने का संकेत दिया है।
विधायक लखपत बुटोला ने इस मौके पर कहा कि कांग्रेस की विचारधारा और जनहित की राजनीति से प्रभावित होकर लगातार लोग पार्टी से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के मुद्दों को मजबूती से उठा रही है और आने वाले समय में संगठन को और मजबूत किया जाएगा।
पोखरी पर फोकस क्यों?
राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो पोखरी क्षेत्र लंबे समय से बदरीनाथ विधानसभा की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में यहां प्रभावशाली चेहरों को अपने साथ जोड़ना कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है। माना जा रहा है कि कांग्रेस अब सिर्फ विपक्ष की भूमिका में नहीं, बल्कि बूथ और वार्ड स्तर पर पकड़ मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
सिर्फ सदस्यता नहीं, चुनावी संदेश भी
स्थानीय जानकारों का कहना है कि यह शामिलीकरण केवल औपचारिक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि चुनावी जमीन तैयार करने की कवायद है। खास बात यह है कि जिन लोगों ने कांग्रेस का दामन थामा है, वे या तो स्थानीय चुनाव लड़ चुके हैं या फिर अपने-अपने क्षेत्र में सामाजिक प्रभाव रखते हैं। ऐसे में यह जोड़-तोड़ आने वाले समय में मतदाता समीकरण को प्रभावित कर सकती है।
बुटोला की बढ़ती सक्रियता
पिछले कुछ समय से विधायक लखपत बुटोला लगातार अपने गृह क्षेत्र और संगठनात्मक आधार वाले इलाकों में सक्रिय नजर आ रहे हैं। राजनीतिक हलकों में इसे उनकी चुनावी किलाबंदी के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस भी यह संदेश देने की कोशिश में है कि वह बदरीनाथ सीट पर सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराने नहीं, बल्कि सीधी लड़ाई के मूड में है।

