
एक शिक्षक था, उसे भी उर्गम भेज दिया
कलगोठ जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक शून्य, वर्षों से एक शिक्षक के भरोसे चल रही थीं छह से आठवीं की कक्षाएं; अब विद्यालय में ग्रामीणों का धरना
संजय कुंवर| विशेष रिपोर्ट
ज्योतिर्मठ। पहाड़ के दूरस्थ गांवों में शिक्षा व्यवस्था की हकीकत सरकारी दावों से इतर नजर आती है। चमोली के कलगोठ गांव का राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय इसका उदाहरण है। यहां कक्षा छह से आठवीं तक की तीन कक्षाएं वर्षों से एकमात्र शिक्षक के भरोसे चल रही थीं। अब शिक्षा विभाग ने उस शिक्षक को भी व्यवस्था के तहत अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज उर्गम भेज दिया। इसके बाद विद्यालय में शिक्षकों की संख्या शून्य हो गई है।
एक ओर दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों को गांव में ही बेहतर शिक्षा देने की बात होती है, दूसरी ओर कलगोठ जैसे विद्यालय में शिक्षक की पूरी व्यवस्था ही खत्म हो गई। यही वजह है कि अभिभावकों और ग्रामीणों का आक्रोश अब आंदोलन में बदल गया है।
एक शिक्षक ने संभाली तीन कक्षाएं
ग्राम प्रधान सहदेव रावत के अनुसार विद्यालय में करीब 25 से 30 बच्चे अध्ययनरत हैं। कक्षा छह से आठवीं तक की तीनों कक्षाओं का संचालन कई वर्षों से सहायक अध्यापक विज्ञान बिरजू राम पटेल के भरोसे था।
ग्रामीणों का कहना है कि सीमित शिक्षकीय संसाधनों के बावजूद शिक्षक ने बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने दिया। विद्यालय के तीन छात्रों का चयन मुख्यमंत्री उन्नयन छात्रवृत्ति के लिए होना भी ग्रामीण शिक्षक की मेहनत से जोड़कर देखते हैं।
एकमात्र शिक्षक भी हटाया, विकल्प नहीं
ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय में पहले से ही स्वीकृत अन्य पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में एकमात्र शिक्षक को भी दूसरे विद्यालय में व्यवस्था के तहत भेज दिया गया।
यहीं से विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिक्षक को उर्गम भेजना जरूरी था तो कलगोठ विद्यालय में पहले वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। बिना किसी विकल्प के शिक्षक को हटाए जाने से विद्यालय पूरी तरह शिक्षक विहीन हो गया।
विद्यालय में धरना, आंदोलन की चेतावनी
शिक्षक को उर्गम भेजे जाने के विरोध में ग्रामीणों और अभिभावकों ने 23 सितंबर से विद्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन और क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। आंदोलन में विद्यालय प्रबंधन समिति और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि बिरजू राम पटेल को उर्गम भेजने का आदेश निरस्त कर उन्हें तत्काल कलगोठ विद्यालय में वापस भेजा जाए। साथ ही विद्यालय में अन्य रिक्त पदों पर भी शिक्षकों की तैनाती की जाए।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक शिक्षण व्यवस्था बहाल नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
शिक्षक नहीं तो गांव में शिक्षा कैसे?
कलगोठ की समस्या सिर्फ एक विद्यालय तक सीमित सवाल नहीं है। दूरस्थ पहाड़ी गांवों में सरकारी विद्यालय बच्चों की शिक्षा के साथ गांव में परिवारों की मौजूदगी से भी जुड़े हैं। विद्यालय में शिक्षक नहीं होंगे तो अभिभावकों के सामने बच्चों की पढ़ाई को लेकर दूसरे विकल्प तलाशने की मजबूरी पैदा होगी।
यही वजह है कि ग्रामीण इसे महज शिक्षक के स्थानांतरण का मामला नहीं मान रहे। उनके लिए सवाल गांव के विद्यालय और बच्चों के भविष्य का है।
अब विभाग की परीक्षा
कलगोठ में शुरू हुआ आंदोलन शिक्षा विभाग के सामने सीधा सवाल खड़ा करता है—क्या किसी दूरस्थ विद्यालय को एकमात्र शिक्षक के भरोसे चलाना और फिर उसी शिक्षक को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के दूसरे विद्यालय भेज देना उचित शिक्षकीय प्रबंधन है?
ग्रामीण इस सवाल का जवाब कार्रवाई के रूप में चाहते हैं। फिलहाल विद्यालय में शिक्षक नहीं है और अभिभावक विद्यालय परिसर में धरने पर हैं। अब नजर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के अगले कदम पर है।
