
ढोल-दमाऊं और मशकबीन की धुन पर गूंजे नंदा के जयकारे, बारिश के बीच रातभर चले जागर
100 से अधिक देव छंतोलियां और डोलियां हुईं शामिल, हजारों श्रद्धालुओं के जयकारों से गूंजा कनोल
पहाड़ रफ्तार
गोपेश्वर। मां नंदा की बड़ी जात का कारवां सोमवार को आला गांव से विदाई के बाद जोखना और सितेल होते हुए नंदानगर के अंतिम गांव कनोल पहुंचा। कुरुड़-दशोली की नंदा डोली, बंड नंदा की डोली, ज्वाल्पा देवी की डोली, बंड भूमियाल और गेदाणु देवता की छंतोली समेत 100 से अधिक देव छंतोलियां, अन्य देव डोलियां और हजारों श्रद्धालु बड़ी जात में शामिल रहे।
आला गांव में सुबह ग्रामीणों ने मां नंदा की डोलियों, छंतोलियों और श्रद्धालुओं को लोकगीतों व जागरों के साथ अगले पड़ाव के लिए विदा किया। इसके बाद बड़ी जात जोखना और सितेल होते हुए कनोल पहुंची। कनोल में मां भगवती के चौक में ग्रामीणों ने फूलों से देव डोलियों और छंतोलियों का भव्य स्वागत किया। दोपहर बाद एक-एक कर डोलियों और छंतोलियों के पहुंचने का सिलसिला चलता रहा। बड़ी जात के साथ तीन चौसिंघा खाड़ू भी कैलास की ओर प्रस्थान कर रहे हैं।
रामणी के बाद बढ़ता गया कारवां
रामणी गांव के बाद बड़ी जात का स्वरूप लगातार भव्य होता जा रहा है। रामणी से आला, जोखना और फिर सितेल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बड़ी जात में शामिल हुए। इससे कनोल पहुंचते-पहुंचते श्रद्धालुओं का कारवां हजारों की संख्या में पहुंच गया। मां नंदा के जयकारों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन से यात्रा मार्ग भक्तिमय बना रहा।
ये देव डोलियां और छंतोलियां पहुंचीं कनोल
कनोल में दसोली-कुरुड़ की नंदा डोली, बंड नंदा की डोली और ज्वाल्पा माई की डोली समेत बंड भूमियाल, गेदाणु देवता और नंदा की छंतोली पहुंचीं। इनके अलावा निजमुला घाटी के सैजी व गाड़ी, फर्स्वाण फाट के जाख देवता खैनुरी, भीमतल्ला, लासी, मजोठी, सेमडुंगरा, सरतोली के भूमियाल व जाख, नौना की भगवती की छंतोली सहित मटई, सेमा, कांडई, पगना, खुनाना, लुंतरा, सुंग, ल्वाणी और रामणी के त्यूना, राजकोटी, भूमिया तथा घूनी के भूमियाल के पश्वा और देव छंतोलियां शामिल हैं।
बड़ी जात में 100 से अधिक देव छंतोलियों और देव निशानों की मौजूदगी ने यात्रा को भव्य स्वरूप दिया है। हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता मां नंदा के प्रति उनकी आस्था, विश्वास और श्रद्धा को दर्शा रही है।

