ऊखीमठ : लम्बगौडी समेत विभिन्न गांवों में पहुंची भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा

Team PahadRaftar

पुष्पवर्षा कर ग्रामीणों ने किया देवी की डोली का स्वागत, दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

लक्ष्मण नेगी ऊखीमठ। सिद्धपीठ कालीमठ से निकली भगवती कालीमाई की द्वितीय चरण की दिवारा यात्रा इन दिनों ल्वारा न्याय पंचायत के विभिन्न गांवों में पहुंच रही है। लम्बगौडी क्षेत्र समेत विभिन्न गांवों में देवी की डोली पहुंचने पर ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने देवी के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

देवी की डोली गांव में पहुंचते ही वातावरण भक्तिमय हो गया। ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर डोली का स्वागत किया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। महिलाओं ने मंगलगीत गाकर देवी का अभिनंदन किया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

दिवारा यात्रा में आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि दिवारा यात्रा के माध्यम से क्षेत्र की आराध्य देवी अपने भक्तों के बीच पहुंचकर उनकी कुशलक्षेम जानती हैं और क्षेत्र की सुख-शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इससे केदारघाटी में दिवारा यात्रा को लेकर विशेष उत्साह बना हुआ है।

देर शाम शल्या गांव पहुंची यात्रा

दिवारा यात्रा समिति के अध्यक्ष लखपत राणा ने बताया कि लम्बगौडी क्षेत्र का भ्रमण करने के बाद भगवती कालीमाई की डोली देर शाम रात्रि प्रवास के लिए शल्या गांव पहुंची। ग्रामीणों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ देवी की डोली का स्वागत किया। रात्रि प्रवास के दौरान देवी की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाएगी।

15 वर्ष बाद होगा कालीमाई और बाबा केदार का मिलन

दिवारा यात्रा प्रभारी प्रकाश पुरोहित ने बताया कि यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव आगामी दिनों में आएगा। इस दौरान भगवती कालीमाई और बाबा केदार का ऐतिहासिक मिलन होगा। करीब 15 वर्ष बाद होने वाले इस पौराणिक एवं धार्मिक मिलन को लेकर केदारघाटी के श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। मिलन के साक्षी बनने के लिए दूर-दराज क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं के केदारनाथ धाम पहुंचने की संभावना है।

दिवारा समिति के महामंत्री सुरेशानन्द गौड़ ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवती कालीमाई और बाबा केदार का मिलन केदारघाटी की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दोनों आराध्य शक्तियों के इस पावन मिलन को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है। मिलन के दौरान होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-अर्चना की तैयारियां की जा रही हैं।

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