
केएस असवाल गौचर। चारधाम यात्रा की लाइफलाइन ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कमेड़ा के पास हाल ही में कराया गया ट्रीटमेंट कार्य पहली ही बारिश में जवाब दे गया। सड़क और सुरक्षा पुस्ते पर पड़ी दरारों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस कार्य को स्थायी समाधान बताकर पूरा किया गया था, वह मानसून की पहली परीक्षा भी पास नहीं कर सका।

चमोली जिले के प्रवेश द्वार कमेड़ा पेट्रोल पंप के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग का यह हिस्सा लंबे समय से भू-धंसाव की चपेट में है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के समय भी इस स्थान को सुरक्षित करने के कई प्रयास हुए, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। इसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण और रखरखाव की जिम्मेदारी एनएचआईडीसीएल को मिली, जिसके तहत भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी ने यहां ट्रीटमेंट कार्य कराया।
यात्रा सीजन शुरू होने से ठीक पहले निर्माण कार्य शुरू होने के कारण सड़क पर भारी अव्यवस्था रही। संकरी जगह होने से एक समय में केवल एक ओर से ही वाहनों की आवाजाही हो सकी। चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को घंटों जाम का सामना करना पड़ा। यातायात सुचारु रखने के लिए पुलिस को लगातार मौके पर तैनात रहना पड़ा।
करीब एक माह पहले निर्माण कार्य पूरा होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब इस संवेदनशील स्थान पर बार-बार धंसाव की समस्या से राहत मिलेगी। लेकिन बारिश शुरू होते ही सड़क और पुस्ता फिर धंसने लगा तथा कई जगह चौड़ी दरारें दिखाई देने लगीं। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
कमेड़ा के प्रधान भागवत मैठाणी ने कहा कि लोगों को भरोसा था कि इस बार स्थायी समाधान होगा, लेकिन पहली ही बारिश में सड़क का दरकना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराए जाने और जिम्मेदार एजेंसी की जवाबदेही तय करने की मांग की।
भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर उस्मान अली ने बताया कि सड़क का कुछ हिस्सा सिंक हुआ है। जल्द ही मरम्मत कर स्थिति सामान्य कर दी जाएगी।
सवाल जो उठ रहे हैं
– पहली ही बारिश में सड़क और पुस्ता क्यों दरक गया?
– क्या निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ?
– यदि यही स्थिति रही तो आगामी मानसून में चारधाम यात्रा मार्ग कितना सुरक्षित रहेगा?
– क्या निर्माण एजेंसी की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच होगी?
कमेड़ा का यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर प्रभावी निगरानी कितनी जरूरी है। यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में यह स्थान यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए फिर बड़ी परेशानी बन सकता है।

