
रूच्छ महादेव में 11 दिवसीय शिव महापुराण कथा संपन्न, पूर्णाहुति के साथ हुआ समापन
11 दिन तक शिवमय रही कालीमठ घाटी, सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हवन-यज्ञ में दी आहुति
लक्ष्मण नेगी ऊखीमठ। पतित पावनी सरस्वती और कालीगंगा के संगम पर स्थित प्राचीन रूच्छ महादेव मंदिर में आयोजित 11 दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का शनिवार को वैदिक मंत्रोच्चार, हवन-यज्ञ और पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया। 11 दिनों तक पूरी कालीमठ घाटी शिवभक्ति, भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रों से गुंजायमान रही।
हरिद्वार के कथावाचक संजय कृष्ण शास्त्री ने कथा के दौरान भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शिव केवल संहार के देवता नहीं, बल्कि करुणा, त्याग, कल्याण और सृष्टि के संरक्षण के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि शिव महापुराण मनुष्य को सत्य, धर्म, संयम, सेवा और भक्ति का मार्ग दिखाता है। श्रद्धा के साथ शिव कथा का श्रवण करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है।
उन्होंने भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों, ज्योतिर्लिंगों, माता पार्वती के तप, भगवान गणेश और कार्तिकेय की महिमा तथा शिवभक्ति के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। कथा के दौरान पूरा वातावरण ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोषों से गूंजता रहा।
समापन दिवस पर आयोजित हवन और पूर्णाहुति में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, लोककल्याण और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना के साथ आहुति दी। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों ने प्रसाद ग्रहण किया।
कथा आयोजक विपिन शास्त्री ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, जनप्रतिनिधियों, क्षेत्रवासियों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं।
इस अवसर पर आचार्य सूरज उनियाल, अमित कोठारी, विजय बहुगुणा, प्रेम प्रकाश भट्ट, आयुष भट्ट, अजय भट्ट, पुरुषोत्तम भट्ट, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मनवर चौहान, चामुंडा देवी दिवारा यात्रा समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह सत्कारी, भगत सिंह सत्कारी, प्रबल सिंह सत्कारी, सूरज सत्कारी, महिपाल सत्कारी, अब्बल सिंह सत्कारी, संजय सिंह सत्कारी सहित चिलौंड, चौमासी, जाल मल्ला, खोन्नू, जाल तल्ला, कोटमा, स्यासू, कविल्ठा और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में शिवभक्त मौजूद रहे।

