लक्ष्मण नेगी ऊखीमठ। उत्तराखंड राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने और पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। संगठन ने 10 जुलाई को प्रदेशभर की तहसीलों में सांकेतिक धरना देकर उपजिलाधिकारियों के माध्यम से शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया है।

अगस्त्यमुनि स्थित प्राथमिक शिक्षक संघ भवन में आयोजित जनपदीय संयुक्त समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में कहा गया कि आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर बाद में बनाए गए टीईटी संबंधी नियम लागू करना न्यायसंगत नहीं है। वक्ताओं का कहना था कि सेवा के बीच में पात्रता परीक्षा अनिवार्य करना शिक्षकों के हितों के विपरीत है।
जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह झिंक्वाण ने कहा कि शिक्षक निर्धारित अर्हताओं के आधार पर नियुक्त हुए हैं। ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद पदोन्नति और सेवा में बने रहने के लिए टीईटी अनिवार्य करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि खेल शुरू होने के बाद उसके नियम नहीं बदले जाते।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष ललित काला ने कहा कि वर्ष 2017 में किए गए संशोधन से लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों पर अतिरिक्त शर्तें थोप दी गई हैं, जिसे शिक्षक स्वीकार नहीं करेंगे। जिला मंत्री दिनेश चंद्र भट्ट ने कहा कि अन्य सरकारी सेवाओं में सेवा के दौरान किसी पात्रता परीक्षा की बाध्यता नहीं है, फिर केवल शिक्षकों के लिए ऐसा प्रावधान भेदभावपूर्ण है।
बैठक में वर्ष 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि नई पेंशन व्यवस्था से कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित हो गया है, इसलिए सरकार को पुरानी पेंशन योजना बहाल करनी चाहिए।
बैठक में तय किया गया कि 10 जुलाई को दोपहर एक से तीन बजे तक सभी तहसील मुख्यालयों में शिक्षक सांकेतिक धरना देंगे। इसके बाद उपजिलाधिकारियों के माध्यम से शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। संगठन ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह झिंक्वाण ने तथा संचालन जिला मंत्री दिनेश चंद्र भट्ट ने किया। इसमें प्रांतीय तदर्थ समिति के सदस्य बीरेंद्र कठैत समेत जनपद और विभिन्न शाखाओं के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।
