जसपाल नेगी पौड़ी। जिला कारागार पौड़ी में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सोमवार से ‘एक जेल-एक उत्पाद’ योजना के तहत पिरूल क्राफ्ट आधारित तीन सप्ताह का उद्यमिता विकास प्रशिक्षण शुरू हो गया। प्रशिक्षण में बंदियों को पिरूल से आकर्षक और उपयोगी हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि रिहाई के बाद वे स्वरोजगार से जुड़ सकें।
जिला उद्योग केंद्र के सहयोग से जनकल्याण सेवा समिति, कोटद्वार की ओर से संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी ने किया। इस दौरान उन्होंने बंदियों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों का अवलोकन कर उनके प्रयासों की सराहना की।
जिलाधिकारी ने कहा कि पिरूल जैसे वन संसाधनों से तैयार उत्पादों की देश-विदेश में मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बंदियों को केवल कौशल नहीं, बल्कि उद्यमिता से भी जोड़ना जरूरी है, ताकि वे रिहाई के बाद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
उन्होंने प्रशिक्षण में वॉल हैंगिंग, बुके, सजावटी वस्तुएं, गृह उपयोगी सामग्री समेत अन्य नवाचार आधारित उत्पाद तैयार कराने के निर्देश दिए। साथ ही तैयार उत्पादों की बायबैक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा, जिससे होने वाली आय का उपयोग बंदी कल्याण और पुनर्वास गतिविधियों में किया जा सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि आपराधिक न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यक्तियों में सकारात्मक परिवर्तन लाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है। रचनात्मक गतिविधियों से बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे भविष्य में सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे।
इस दौरान जेल अधीक्षक कौशल कुमार, जिला उद्योग केंद्र की प्रबंधक उपासना सिंह, मास्टर ट्रेनर सरोज बिष्ट व प्रियतमा, जनकल्याण सेवा समिति के करन, सचिन नेगी तथा प्रभारी जेलर गौरव कुमार टम्टा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

