चमोली : संघ से भाजपा तक : अतुल शाह की नई राजनीतिक पारी, बदरीनाथ सीट पर बढ़ीं सियासी चर्चाएं

Team PahadRaftar

संघ से भाजपा तक : अतुल शाह की नई राजनीतिक पारी, बदरीनाथ सीट पर बढ़ीं सियासी चर्चाएं

– प्रदेश व्यवसायिक प्रकोष्ठ के संयोजक बनाए गए अतुल शाह
– सामाजिक, व्यापारिक और संगठनात्मक सक्रियता के चलते बढ़ी राजनीतिक अहमियत
– 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बदरीनाथ सीट पर संभावित दावेदारों में नाम की चर्चा तेज

चमोली। उत्तराखंड की राजनीति में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से हलचल तेज होने लगी है। इसी बीच चमोली जिले के पीपलकोटी निवासी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े अतुल शाह का भारतीय जनता पार्टी में औपचारिक प्रवेश राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। देहरादून स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। भाजपा नेतृत्व ने उन्हें प्रदेश व्यवसायिक प्रकोष्ठ का संयोजक नियुक्त कर संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी है।

अतुल शाह का सार्वजनिक जीवन केवल संगठन तक सीमित नहीं रहा है। पिछले चार दशकों से संघ की विचारधारा से जुड़े शाह बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और बंड विकास संगठन दशोली जैसे संगठनों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। वर्तमान में वे व्यापार संघ के प्रदेश संगठन मंत्री हैं और व्यापारियों के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। इसके अलावा बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र के दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य शिविर, सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम और जनसेवा की गतिविधियों के कारण उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। एकल विद्यालय, विद्या भारती, राम जन्मभूमि आंदोलन और श्रीराम मंदिर निर्माण अभियान में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने प्रदेश स्तर पर जिम्मेदारी देकर शाह के संगठनात्मक अनुभव और जनसंपर्क पर भरोसा जताया है। ऐसे समय में जब पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार कर रही है, यह जिम्मेदारी उनके राजनीतिक कद को भी मजबूत करती दिखाई दे रही है।

बदरीनाथ विधानसभा सीट पर भाजपा के भीतर पहले से ही आधा दर्जन से अधिक नेताओं के नाम संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं। अतुल शाह के भाजपा में शामिल होने और प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका नाम भी इस सूची में तेजी से उभरकर सामने आया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि अतुल शाह अपनी संगठनात्मक सक्रियता और जनसंपर्क को इसी तरह मजबूत बनाए रखते हैं तो आने वाले समय में बदरीनाथ विधानसभा की राजनीति में उनकी भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं। फिलहाल उनका भाजपा में प्रवेश संगठनात्मक विस्तार के साथ-साथ आगामी चुनावी समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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