चमोली : भूस्खलन की जद में राजकीय पॉलिटेक्निक गौचर, एक साल बाद भी नहीं सुधरे हालात

Team PahadRaftar

मानसून से पहले बढ़ी चिंता, भूस्खलन की जद में राजकीय पॉलिटेक्निक गौचर

गौचर, केएस असवाल : जनपद चमोली का सबसे पुराना और बड़ा तकनीकी संस्थान राजकीय पॉलिटेक्निक गौचर आज बदहाली और सरकारी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। पिछले वर्ष आई आपदा में संस्थान का बड़ा हिस्सा भूस्खलन की चपेट में आ गया था, लेकिन करीब एक वर्ष बीतने के बाद भी न तो सुरक्षा कार्य शुरू हो पाए हैं और न ही क्षतिग्रस्त भवनों का पुनर्निर्माण हो सका है। अब मानसून नजदीक आते ही छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की चिंता बढ़ने लगी है।

वर्ष 1979 के दशक में पूर्व मंत्री डॉ. शिवानंद नौटियाल की पहल पर स्थापित यह संस्थान पर्वतीय क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। वर्तमान में यहां 400 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। बीते अगस्त माह में हुई भारी बारिश के दौरान संस्थान की सुरक्षा दीवार और भवन का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। तत्काल खतरे को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित हिस्से को पॉलिथीन से ढक दिया, लेकिन उसके बाद मामला फाइलों तक ही सीमित रह गया।

गौचर व्यापार संघ अध्यक्ष राकेश लिंगवाल ने कहा कि जनपद के सबसे बड़े तकनीकी संस्थान की इस तरह उपेक्षा होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आपदा को लगभग एक वर्ष होने जा रहा है, लेकिन पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में मानसून के दौरान फिर से भारी बारिश होने पर बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अधूरे पड़े भवनों और अव्यवस्थाओं के कारण छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

नगर पालिका अध्यक्ष संदीप नेगी ने बताया कि संस्थान में हो रहे भूस्खलन को लेकर विधायक और जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

संस्थान के प्राचार्य राजकुमार ने कहा कि संस्थान की ओर से जिलाधिकारी और क्षेत्रीय विधायक अनिल नौटियाल को ज्ञापन देकर स्थिति से अवगत कराया गया था। बावजूद इसके अब तक मरम्मत और सुरक्षा कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं।

वहीं कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश नेगी ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में स्थापित यह संस्थान आज उपेक्षा का दंश झेल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसर का बड़ा हिस्सा भूस्खलन की चपेट में है, लेकिन ट्रीटमेंट कार्य तक नहीं कराया गया। कई भवन वर्षों से अधूरे पड़े हैं और बजट का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर पुनर्निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि मानसून सिर पर है और यदि समय रहते सुरक्षा कार्य नहीं किए गए तो संस्थान में अध्ययनरत सैकड़ों छात्र-छात्राओं की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में शासन-प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान की मांग तेज हो गई है।

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