ज्योतिर्मठ : महिषासुर वध के साथ ‘हस्तोला कौथीग’ संपन्न, लोक परंपराओं की दिखी झलक

Team PahadRaftar

महिषासुर वध के साथ ‘हस्तोला कौथीग’ संपन्न, लोक परंपराओं की दिखी झलक

ज्योतिर्मठ/बड़ागांव (संजय कुंवर)। सीमांत क्षेत्र बड़ागांव के कंथीर तोक में आयोजित पौराणिक लोक देव उत्सव ‘हस्तोला कौथीग’ का मंगलवार को महिषासुर वध के साथ समापन हो गया। आयोजन में क्षेत्र की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक देखने को मिली।

बैसाख माह में आयोजित होने वाला यह मेला हर दो वर्ष में आयोजित किया जाता है। इस बार 28 अप्रैल को आयोजित मेले की शुरुआत पारंपरिक मुखौटा नृत्य से हुई। 18 तालों पर भगवान गणेश, सूर्य, नृसिंह समेत विभिन्न देवी-देवताओं के स्वरूपों में सजे कलाकारों ने आकर्षक प्रस्तुतियां दीं।

इसके बाद जागर शैली में रामायण के विभिन्न प्रसंगों—स्वयंवर, वनगमन, स्वर्ण मृग और सीता हरण—की मूक प्रस्तुति दी गई। राम, लक्ष्मण और सीता के पात्रों ने ढोल-दमाऊं की थाप पर पारंपरिक नृत्य कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

मेले में हास्य रंग भी देखने को मिला। लोक कलाकारों ने नीति बॉर्डर के भारत-तिब्बत व्यापार की झलक प्रस्तुत की। साथ ही गोरखा शासनकाल में गढ़वाली वीरों की मल्ल युद्ध कला, पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते ‘कुर जोगी’, चोर और पहलवान नृत्य ने भी दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी।

अंत में मां भगवती के पश्वा के अवतरण के साथ महिषासुर के प्रतीक ‘हस्ती’ का वध किया गया, जो मेले का मुख्य आकर्षण रहा। इसके साथ ही हस्तोला कौथीग का विधिवत समापन हो गया।

बड़ागांव सहित आसपास के क्षेत्रों में इस मेले का विशेष महत्व है। हर वर्ष बारी-बारी से ‘हस्तोला’ और ‘गरुड़ छाड़’ मेले का आयोजन किया जाता है, जिनकी परंपराएं अलग-अलग हैं। आयोजन में सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति रही।

Leave a Reply

You May Like