
श्रमदान से बना पुल, सरकार के दावों की खुली पोल
पुल टूटा तो गांव कटे, फिर खुद ही बने ‘इंजीनियर’
कल्पगंगा पर सिस्टम फेल, छह घंटे के श्रमदान से गांवों ने बहाल की जिंदगी
संजय कुंवर / रघुबीर नेगी
चमोली : हेलंग-भर्की-पिलखी मोटर मार्ग पर कल्पगंगा नदी में बन रहे दो पुल पांच साल बाद भी अधूरे पड़े हैं। सरकारी सुस्ती से परेशान ग्रामीणों ने आखिरकार खुद ही मोर्चा संभाल लिया। अरोसी, क्वाणा, भर्की और पिलखी गांव के लोगों ने श्रमदान कर लकड़ियों की बल्लियों से अस्थायी पुल खड़ा कर दिया और आवाजाही बहाल कर दी।
दरअसल, इस मार्ग को तैयार हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन सबसे अहम कड़ी—कल्पगंगा पर पुल—अब तक पूरा नहीं हो पाया। वर्ष 2021-22 में पुल निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई थी, मगर आज तक केवल ढांचा ही खड़ा हो सका है। हालात तब और बिगड़ गए जब बीते दिनों क्षेत्र का एकमात्र अस्थायी पुल भी टूट गया। इसके बाद ग्रामीणों को मीलों पैदल चलने को मजबूर होना पड़ा।
छह घंटे में खड़ा कर दिया पुल
गांव के युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर महज छह घंटे की कड़ी मेहनत से लकड़ी और स्थानीय संसाधनों से अस्थायी पुल तैयार कर दिया। इस दौरान प्रेम सिंह, माधवर सिंह, लक्ष्मण सिंह, पूरण सिंह चौहान, धर्म सिंह, सुरेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, हरवर्धन सिंह और अंकेश चौहान सहित कई ग्रामीणों ने भागीदारी निभाई।
विकास’ के दावों पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क तो बन गई, लेकिन पुल अधूरे होने से उसका कोई फायदा नहीं मिल पा रहा। प्रशासन और विभागीय उदासीनता के चलते लोगों को आज भी जोखिम उठाकर आवाजाही करनी पड़ रही है।
अधिकारियों का दावा—काम जारी
पीएमजीएसवाई के सहायक अभियंता डीएस चौहान का कहना है कि पुल निर्माण कार्य प्रगति पर है और जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा, जिससे आवाजाही सुचारू हो सकेगी।

