
लंगूरों से बचाव को तीन-स्तरीय रणनीति, बागवानों को दी गई अहम सलाह
संजय कुंवर
जोशीमठ। क्षेत्र में लंगूरों के बढ़ते आतंक से परेशान बागवानों के लिए विशेषज्ञों ने तीन-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली अपनाने की सलाह दी है। इस व्यवस्था में बाहरी घेराबंदी, मनोवैज्ञानिक बचाव और फसल स्तर पर सुरक्षा को शामिल किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार पहले स्तर पर सोलर फेंसिंग और कांटेदार जैव-बाड़ लगाकर लंगूरों को बगीचे में प्रवेश से रोका जा सकता है। इसके लिए किलमोड़ा और घिंगारू जैसी स्थानीय झाड़ियों को उपयोगी बताया गया है।

दूसरे स्तर पर लंगूरों को डराने के लिए तेंदुए के पुतले, ध्वनि यंत्र और दर्पण का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। समय-समय पर इन उपायों में बदलाव करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
तीसरे स्तर पर फसल सुरक्षा के लिए नायलॉन जाल और जैविक स्प्रे को प्रभावी बताया गया है। गोमूत्र, लहसुन और मिर्च से तैयार घोल का छिड़काव करने से लंगूर पेड़ों से दूर रहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक उपाय पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सभी स्तरों पर एक साथ काम करने से ही समस्या का समाधान संभव है। साथ ही हर 10-15 दिन में तरीकों में बदलाव करना भी जरूरी है, ताकि लंगूर इन उपायों के अभ्यस्त न हो सकें।

