रूद्रप्रयाग : दहकते अंगारों पर देव नृत्य, केदारघाटी का जाख मेला बना आस्था का केंद्र

Team PahadRaftar

नर पश्वा ने तीन बार अग्निकुंड में किया प्रवेश, हजारों श्रद्धालु रहे साक्षी

लक्ष्मण नेगी 

गुप्तकाशी (रुद्रप्रयाग) : केदारघाटी में आयोजित प्रसिद्ध जाख मेले में इस बार आस्था और रोमांच का अद्भुत संगम देखने को मिला। देवशाल गांव स्थित जाख देवता मंदिर में नर पश्वा ने दहकते अंगारों पर नृत्य कर श्रद्धालुओं को चमत्कृत कर दिया। मेले में हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने भगवान जाख के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।

इस वर्ष मेले की खास बात यह रही कि नर पश्वा ने तीन बार अग्निकुंड में प्रवेश कर नृत्य किया और भक्तों को आशीर्वाद दिया। ढोल-दमाऊ और जयकारों के बीच हुए इस दृश्य ने हर किसी को रोमांचित कर दिया।

मेले के लिए करीब 100 कुंतल लकड़ियों से विशाल अग्निकुंड तैयार किया गया, जिसकी ऊंचाई करीब 10 फीट तक पहुंची। परंपरा के अनुसार नर पश्वा दहकते अंगारों पर नृत्य कर देव शक्ति का प्रदर्शन करते हैं, जिसे देखने दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं।

मेले से पहले तीन दिन तक देवशाल, कोठेडा और नारायणकोटी गांवों में विशेष परंपराएं निभाई गईं। इस दौरान गांवों में बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित रहा। वहीं भक्तजन नंगे पांव जंगल से लकड़ियां लाकर “गोठी बिठाना” की परंपरा निभाते हैं।

देवयात्रा के साथ मेले की शुरुआत हुई, जिसमें नर देवता को मूल स्थान से विंध्यवासिनी मंदिर तक लाया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बीच देव अवतरण हुआ और नर पश्वा ने अग्निकुंड में उतरकर नृत्य किया।

पौराणिक मान्यता के अनुसार जाख देवता का संबंध महाभारत काल के यक्ष से माना जाता है। यह मेला केदारघाटी की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।

इस अवसर पर मुख्य पुजारी सुभाष भट्ट सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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