
8 फीट तक जमी बर्फ के बीच रास्ता बनाने में जुटे जवान, 23 मई को खुलेंगे कपाट
संजय कुंवर
चमोली : विश्व प्रसिद्ध सिख तीर्थस्थल की यात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। बुधवार को भारतीय सेना और गुरुद्वारा ट्रस्ट के सेवादारों ने संयुक्त रूप से बर्फ हटाने का अभियान शुरू कर दिया। अरदास के बाद दल गोविंदघाट से घंगरिया के लिए रवाना हुआ।
ट्रस्ट के सीईओ सरदार सेवा सिंह ने हरी झंडी दिखाकर टीम को रवाना किया। दल का नेतृत्व सेना की 418 माउंटेन ब्रिगेड की 9 (आई) माउंटेन ब्रिगेड की 418 इंडिपेंडेंट फील्ड कंपनी के सूबेदार कर रहे हैं।
रेकी में सामने आया था कि हेमकुंट साहिब और अटलाकोटी ग्लेशियर क्षेत्र में आठ फीट से अधिक बर्फ जमी है। ऐसे में जवानों और सेवादारों के लिए रास्ता तैयार करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। टीम घंगरिया को बेस कैंप बनाकर रोजाना ऊपर की ओर बर्फ काटकर मार्ग बनाएगी।
ट्रस्ट के अनुसार, लगातार तीन सप्ताह की मेहनत के बाद पैदल मार्ग को तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित बना दिया जाएगा। इस वर्ष हेमकुंट साहिब के कपाट 23 मई 2026 को खोले जाएंगे, जबकि पहला जत्था 20 मई को ऋषिकेश से रवाना होगा।
करीब 15,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह पवित्र धाम सात बर्फीली चोटियों और लोकपाल झील से घिरा है। सिखों के दसवें गुरु की तपस्थली होने के कारण यहां हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
ट्रस्ट के अध्यक्ष सरदार नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने सेना का आभार जताते हुए कहा कि जवानों की निःस्वार्थ सेवा से ही यह कठिन यात्रा हर साल सफलतापूर्वक संपन्न हो पाती है।

