चमोली : सफेद हाथी बना बीएसएनएल टावर, नेटवर्क को तरसे ग्रामीण

Team PahadRaftar

एक साल से तैयार खड़ा टावर, फोन पर बात करने को 10 किमी पैदल चलने की मजबूरी

चमोली : डिजिटल इंडिया के दौर में भी जिले के निजमुला घाटी के मोली-हड़ूंग क्षेत्र के ग्रामीण संचार सुविधा से वंचित हैं। यहां भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) का मोबाइल टावर एक साल पहले बनकर तैयार हो गया, लेकिन आज तक इसमें नेटवर्क शुरू नहीं हो पाया है। हालात यह हैं कि ग्रामीणों को एक कॉल करने के लिए 8 से 10 किलोमीटर दूर ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार टावर लगने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अब संचार की समस्या दूर हो जाएगी, लेकिन टावर केवल दिखावा बनकर रह गया है। क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क न होने से लोगों के फोन बेकार साबित हो रहे हैं।

ग्राम प्रधान भगत फर्स्वाण ने बताया कि आज के समय में संचार सुविधा बेहद जरूरी है, लेकिन गांव के लोग इससे वंचित हैं। बात करने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, जिससे समय और श्रम दोनों की बर्बादी होती है।

पूर्व ग्राम प्रधान बृज लाल ने बताया कि नेटवर्क न होने से सबसे ज्यादा परेशानी आपात स्थिति में होती है। किसी के बीमार होने या दुर्घटना होने पर न तो एम्बुलेंस को सूचना दी जा सकती है और न ही परिजनों से संपर्क हो पाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सरकार डिजिटल सेवाओं के विस्तार की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत है। करोड़ों रुपये खर्च कर लगाया गया टावर बिना नेटवर्क के खड़ा है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही टावर में नेटवर्क शुरू नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे।

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