गांव-गांव पहुंच रही देवी की डोली, 30 अप्रैल से फलासी में होगा नौ दिवसीय महा बन्याथ

लक्ष्मण नेगी
ऊखीमठ। चोपता क्षेत्र इन दिनों भगवती चण्डिका की दिवारा यात्रा से भक्तिमय बना हुआ है। करीब 25 वर्षों बाद निकली यह यात्रा क्षेत्र के गांव-गांव पहुंचकर श्रद्धालुओं को आस्था से जोड़ रही है। देवी की डोली के स्वागत के लिए जगह-जगह श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है और पूरे क्षेत्र में भक्ति का माहौल बना हुआ है।
दिवारा यात्रा के दौरान भगवती चण्डिका डोली स्वरूप में विराजमान होकर विभिन्न गांवों का भ्रमण कर रही हैं। गांवों में देवी के पहुंचते ही पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया जा रहा है। ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में देवी की अगवानी कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
यात्रा के चलते पूरे क्षेत्र में धार्मिक आस्था के साथ लोकसंस्कृति की भी सुंदर झलक देखने को मिल रही है। जानकारी के अनुसार, यह दिवारा यात्रा 27 अप्रैल तक जाखणी, मलाऊं और फलासी क्षेत्र के विभिन्न गांवों का भ्रमण करती रहेगी। इस दौरान देवी भक्तों को आशीर्वाद देने के साथ क्षेत्र की समृद्धि और कल्याण का संदेश भी दे रही हैं।
इस धार्मिक आयोजन में स्थानीय युवाओं, महिला मंगल दलों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे आयोजन क्षेत्र में एकता, सहयोग और धार्मिक मूल्यों को मजबूत करते हैं।
फलासी में 30 अप्रैल से शुरू होगा नौ दिवसीय महा बन्याथ
दूसरी ओर, भगवती चण्डिका की तपस्थली फलासी गांव में आगामी 30 अप्रैल से नौ दिवसीय महा बन्याथ (महायज्ञ) का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आयोजन समिति की ओर से यज्ञ स्थल की साफ-सफाई, व्यवस्थाओं के निर्माण और श्रद्धालुओं के ठहरने व भोजन की समुचित व्यवस्था की जा रही है।
तुगेश्वर मंदिर समिति अध्यक्ष मानवेन्द्र बर्त्वाल ने बताया कि महा बन्याथ के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, हवन-यज्ञ, कथा-कीर्तन और भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होंगे।
वहीं, समिति के सचिव पूर्ण सिंह खत्री ने कहा कि भगवती चण्डिका की दिवारा यात्रा और महा बन्याथ जैसे आयोजन क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।
