
बंजर जमीन पर उगाया जंगल, सरोजनी मैठाणी ने लिखी हरियाली की मिसाल
बंजर ज़मीन से खड़ा किया हरा-भरा जंगल, सरोजनी मैठाणी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
पर्यावरण संरक्षण और ऑर्गेनिक खेती के लिए कल्याणी महिला सम्मान से सम्मानित
लक्ष्मण नेगी
रुद्रप्रयाग/तुंगनाथ घाटी : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कल्याणी सामाजिक संस्था द्वारा तुंगनाथ घाटी के मक्कूमठ निवासी सरोजनी मैठाणी को तीन दशकों से पर्यावरण संरक्षण और ऑर्गेनिक खेती के संवर्धन के लिए ‘सातवां कल्याणी महिला सम्मान’ प्रदान किया गया।

सरोजनी मैठाणी ने अपने अथक प्रयासों से बंजर पड़ी भूमि को हरियाली में बदलने का कार्य किया। उन्होंने दुधारू पशुओं के लिए चारा-घास, जलाऊ लकड़ी के लिए बांज और बुरांश जैसे पौधों का रोपण कर एक ऐसा जंगल तैयार किया, जो आज उनकी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा कर रहा है। उनके इस प्रयास से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला, बल्कि आत्मनिर्भरता की एक अनूठी मिसाल भी कायम हुई है।

पहाड़ी क्षेत्रों में जहां चारा और जलाऊ लकड़ी के लिए दूर-दूर तक जंगलों पर निर्भर रहना पड़ता है, वहीं सरोजनी मैठाणी के इस प्रयास ने स्थानीय लोगों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत किया है। अब उन्हें अपने मवेशियों के लिए चारा या जलाऊ लकड़ी के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता, बल्कि उनकी खुद की जमीन पर विकसित हरियाली ही उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही है।
उनकी यह मुहिम पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अनुसरणीय है और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण आत्मनिर्भरता को भी सशक्त करने वाली है। सम्मान प्राप्त होने पर जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने सरोजनी मैठाणी को शुभकामनाएं देते हुए उनके कार्यों की सराहना की।

