
विश्व धरोहर फूलों की घाटी में आगामी पर्यटन सत्र की तैयारियाँ तेज, उप वन संरक्षक ने किया स्थलीय निरीक्षण

संजय कुंवर फूलों की घाटी
फूलों की घाटी नेशनल पार्क में आगामी पर्यटन सीजन को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए वन विभाग ने तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। 24 व 25 दिसम्बर को उप वन संरक्षक अभिमन्यु ने फूलों की घाटी का विस्तृत भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उनके साथ वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल, अनुभाग अधिकारी जय प्रकाश और घाटी के समस्त वन आरक्षी मौजूद रहे।

प्रमुख लिए गए निर्णय
पर्यटक सुविधाओं पर चर्चा
भ्रमण के दौरान आगामी सत्र में पर्यटकों को दी जाने वाली सुविधाओं पर विस्तृत कार्ययोजना बनाई गई। मुख्य उद्देश्य इको-पर्यटन (Eco-Tourism) को बढ़ावा देना और यात्रियों के लिए मार्ग व अन्य सुविधाओं को सुलभ बनाना है। इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए एक इंटरप्रेटेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी। साथ ही, प्रशिक्षित स्थानीय गाइडों की नियुक्ति होगी, जो पर्यटकों को घाटी की पारिस्थितिकी, वन्यजीवों और सांस्कृतिक विरासत की गहरी जानकारी देंगे। घाटी में वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि जैव-विविधता और पारिस्थितिकी का सटीक डेटा प्राप्त हो सके। शोधकर्ताओं को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वनस्पतियों और वन्यजीवों के रियल-टाइम अपडेट मिल सकें। यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण घाटी के दीर्घकालिक संरक्षण और प्रभावी प्रबंधन के लिए साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
वन्यजीवों की सक्रियता
घाटी में लगाए गए कैमरा ट्रैप्स (Camera Traps) की जांच की गई। कैमरों में भारी मात्रा में वन्यजीवों की मौजूदगी दर्ज की गई है, जो यह सिद्ध करता है कि फूलों की घाटी केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि समृद्ध वन्यजीवों के लिए भी एक सुरक्षित आवास है।
इको विकास समिति (EDC) का निरीक्षण
अभिमन्यु ने इको विकास समिति भ्यूंडार के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने समिति के सचिव को निर्देशित किया कि स्थानीय भागीदारी और व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए।
आधुनिक तकनीक से डिजिटल गश्त (Drone Surveillance)
सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए इस बार आधुनिक तकनीक का विशेष प्रयोग किया गया। पूरी घाटी की ड्रोन के माध्यम से हवाई निगरानी की गई। इस गश्त का मुख्य उद्देश्य घाटी के उन दुर्गम और ऊँचाई वाले क्षेत्रों की स्थिति जानना था । ड्रोन सर्च के दौरान घाटी में कहीं भी कोई अवैध गतिविधि या बाहरी हस्तक्षेप दर्ज नहीं किया गया।
अतिक्रमण पर सख्त रुख
घांघरिया वन क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर उप वन संरक्षक ने कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उल्लंघन करने वालों पर तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, दुर्गम क्षेत्र होने के कारण कार्मिकों के लिए सुरक्षित हाई-टेक गियर उपलब्ध कराए जाएंगे.
