
लक्ष्मण नेगी
ऊखीमठ : केदारघाटी सहित सहित विभिन्न इलाकों में लम्बे समय से अघोषित विद्युत कटौती होने से उपभोक्ताओं में ऊर्जा निगम के खिलाफ आक्रोश बना हुआ है जो कि कभी सड़कों पर फूट सकता है। आपदा प्रभावितों का कहना है कि एक तरफ मूसलाधार बारिश तथा दूसरी तरफ अघोषित विद्युत कटौती होने से उपभोक्ता दोहरी मार झेलने को विवश बना हुआ है।

ऊर्जा निगम की लापरवाही से सम्पूर्ण केदार घाटी सहित आसपास के इलाकों में बिजली गुल होना आम बात बनी हुई है। सीमांत क्षेत्रों में कई घन्टों तक बिजली के गुल होने का खामियाजा सीमांत गांवों के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। अघोषित विद्युत कटौती से भगवान केदारनाथ के शीतकालीन गद्दी ओंकारेश्वर मन्दिर में शाम – सुबह होने वाले वेदपाठ , नौनिहालों का पठन – पाठन के साथ विद्युत व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों का कामकाज खासा प्रभावित हो रहा है। सीमांत गांवों के ग्रामीण मीलों दूरी तय कर सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों में अपने निजी कार्य करने के उद्देश्य से तहसील व विकासखंड मुख्यालय तो पहुंचते है मगर घन्टों बिजली गुल होने से उन्हे बैरंग लौटना पड़ता है। क्षेत्र में लम्बे समय से अघोषित विद्युत कटौती होने के कारण उपभोक्ताओं में ऊर्जा निगम के खिलाफ खासा आक्रोश बना हुआ है जो कि कभी भी सड़कों पर फूट सकता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि ऊर्जा निगम की लापरवाही के कारण क्षेत्र में लम्बे समय से अघोषित विद्युत कटौती की समस्या बनी हुई है। जानकारी देते हुए कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ प्रदेश महामंत्री आनन्द सिंह रावत ने बताया कि ऊखीमठ सहित आसपास के इलाको मे 24 घन्टों में 48 बार विद्युत कटौती होना आम बात हो गयी है। उनका कहना है कि केदार घाटी में तीन लघु जल विद्युत परियोजनाओं से विद्युत उत्पादन होने के बाद भी विद्युत कटौती होना स्थानीय उपभोक्ताओं के साथ सरासर धोखा होने के साथ ऊर्जा निगम की लापरवाही साफ उजागर होती है। तुंगनाथ घाटी निवासी महिपाल बजवाल ने बताया कि गर्मियों के सीजन मे अघोषित विद्युत कटौती होने से तुंगनाथ घाटी के व्यापारियों का कारोबार खासा प्रभावित हो रहा है तथा सांय ढलते ही बिजली गुल होना आम बात बनी हुई है। मदमहेश्वर घाटी के ग्राम पंचायत बुरूवा के नवनिर्वाचित प्रधान मदन भट्ट ने बताया कि सीमांत गांवों में अघोषित विद्युत कटौती की समस्या लम्बे समय से बनी हुई है तथा ऊर्जा निगम के अधिकारियों को बार – बार अवगत कराने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। ओंकारेश्वर वार्ड के सभासद प्रदीप धर्म्वाण ने बताया कि भगवान केदारनाथ के शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मन्दिर में वेदपाठ शुरू होते ही बिजली गुल होना महीनों से जारी है। मदमहेश्वर घाटी राऊलैक के नवनिर्वाचित क्षेत्र पंचायत सदस्य राकेश नेगी ने बताया कि सीमांत गांवों के ग्रामीण सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों में कई मीलों दूरी तय करने के बाद तहसील मुख्यालय पहुंचते है मगर घन्टों बिजली के गुल रहने से ग्रामीणों को बैरंग लौटना पड़ता है। ग्राम पंचायत उषाडा के नवनिर्वाचित प्रतिपाल बजवाल, कालीमठ घाटी जाल मल्ला के नवनिर्वाचित प्रधान त्रिलोक रावत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते केदार घाटी मे हो रही अघोषित विद्युत कटौती पर विराम नही लगा तो जनप्रतिनिधियों व उपभोक्ताओं को ऊर्जा निगम के खिलाफ सड़को पर उतरने के लिए बाध्य होना पड़ेगा जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन- प्रशासन व ऊर्जा निगम की होगी।

