पीपलकोटी : 40 साल का सफर, 25वें बंड मेले को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी

Team PahadRaftar

20 दिसंबर से सजेगा मेला, संस्थापक सदस्यों का होगा सम्मान; ‘बंड : एक विरासत’ स्मारिका भी होगी प्रकाशित

पीपलकोटी। बंड विकास संगठन के चार दशक के सफर और बंड मेले की रजत जयंती को यादगार बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। 20 दिसंबर 2026 से प्रस्तावित 25वें बंड मेले को इस बार खास बनाने के लिए संगठन ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। मेले में जहां पहाड़ की संस्कृति और परंपराओं की झलक दिखेगी, वहीं स्थानीय प्रतिभाओं, रोजगार और जनकल्याण को भी प्रमुखता दी जाएगी।

संगठन के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मेले के आयोजन को लेकर चर्चा की गई। तय किया गया कि वर्ष 1986-87 में संगठन की स्थापना में योगदान देने वाले संस्थापक सदस्यों और उनके परिजनों को आमंत्रित कर सम्मानित किया जाएगा। संगठन की चार दशक की यात्रा, संघर्ष और उपलब्धियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ‘बंड : एक विरासत’ नाम से विशेष स्मारिका भी प्रकाशित की जाएगी। इसमें क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और विकास यात्रा को जगह दी जाएगी।

लोक संस्कृति के साथ दिखेगी स्थानीय प्रतिभाओं की चमक

मेले में उत्तराखंड के प्रसिद्ध कलाकारों को आमंत्रित करने के साथ स्थानीय कलाकारों, स्कूली बच्चों, महिला मंगल दलों और युवाओं को भी मंच दिया जाएगा। लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और पहाड़ी संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहेंगे। युवाओं और महिलाओं के लिए खेलकूद प्रतियोगिताएं कराने पर भी सुझाव दिए गए।

स्वास्थ्य शिविर और रोजगार पर भी रहेगा फोकस

इस बार मेले को मनोरंजन के साथ जनकल्याण का माध्यम बनाने की योजना है। इसके तहत निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं परामर्श शिविर लगाए जाएंगे। जरूरतमंदों को स्वास्थ्य उपकरण उपलब्ध कराने और सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर पात्र लोगों को लाभ दिलाने का प्रयास होगा। वहीं, स्थानीय काश्तकारों, हस्तशिल्पकारों, व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को अपने उत्पाद और सेवाएं प्रदर्शित करने का अवसर दिया जाएगा। पहाड़ी उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और हस्तशिल्प को बाजार उपलब्ध कराने पर भी जोर रहेगा।

पूर्व अध्यक्ष एवं संरक्षक अतुल साह ने कहा कि बंड विकास संगठन की 40 वर्षों की यात्रा क्षेत्र की एकता, सामाजिक समरसता और सामूहिक विकास की कहानी है। 25वें मेले को ऐतिहासिक बनाने के साथ इसे संस्कृति, विरासत, रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा देने वाला मंच बनाने का संकल्प है।

बैठक में संरक्षक शंभू प्रसाद सती, गजेंद्र सिंह राणा, सुनील कोठियाल, दीपक पंत, दीपक सती, लक्ष्मण सिंह चौहान, रघुनाथ सिंह फर्स्वाण, किशन सिंह पुंडीर, संतोष नेगी, मथुरा प्रसाद, नरेंद्र पोखरियाल, मीना बिष्ट, धनेश्वरी देवी, कलावती देवी, सविता मिश्रा, गंगा देवी, सुनीता देवी, प्रीति भट्ट और उषा देवी सहित अनेक लोग मौजूद रहे। संचालन महामंत्री हरीश पुरोहित ने किया।

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