चमोली : 12 बरस में फेर होली भेंट, नंदा जाण ट्वेन ते ऊंचा कैलाश

Team PahadRaftar

लाटू देवता की अगुवाई में वाण से निर्जन पड़ावों के लिए रवाना हुई बड़ी जात, विदाई के वक्त भावुक हुए श्रद्धालु

पहाड़ रफ्तार

वाण। हिमालय की अधिष्ठात्री मां नंदा की बड़ी जात अब निर्जन पड़ावों की ओर बढ़ चली है। गुरुवार को वाण गांव से लाटू देवता की अगुवाई में दशोली, बंड और बधाण की नंदा डोलियों समेत 100 से अधिक देव डोलियां, छंतोलियां और निजा निशाण कैलाश की ओर रवाना हुए। मां नंदा को विदा करते समय वाण में माहौल भावुक हो गया। ग्रामीण और श्रद्धालु लोकगीतों और जागरों के बीच फफककर रो पड़े और मां नंदा से 12 वर्ष बाद फिर भेंट का वचन लिया।

वाण गांव में सुबह से ही आस्था का सैलाब उमड़ा रहा। श्रद्धालुओं ने नंदा डोलियों की पूजा-अर्चना कर भेंट अर्पित की। इसके बाद लाटू देवता की अगुवाई में बड़ी जात रणकधार, नीलगंगा और जौंमंगरा होते हुए गैरोली पाताल/वेदनी बुग्याल पहुंची, जहां रात्रि विश्राम होगा।

बड़ी जात में दशोली, बंड और बधाण की नंदा डोली, ज्वाल्पा माई, बंड भूमियाल, गेदाणु देवता, नंदा की छंतोली सहित निजमुला घाटी, फर्स्वाण फाट, भीमतल्ला, लासी, मजोठी, सेमडूंगरा, सरतोली, जाख, नौना, मटई, सेमा, कांडई, पगना, खुनाना, लुन्तरा, सुंग, ल्वाणी और रामणी क्षेत्र की विभिन्न देव छंतोलियां शामिल हैं। जयकारों के बीच देव डोलियों के निर्जन पड़ावों की ओर बढ़ने से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

‘गौरा जी… त्वेन जाण नंदा, तैं ऊंचा कैलाश’ पर झूमे श्रद्धालु

बड़ी जात में लोकगायक दर्शन फर्स्वाण और वीरेंद्र सिंह नेगी के नंदा गीत भी श्रद्धालुओं की जुबां पर छाए हैं। दर्शन फर्स्वाण का गीत ‘गौरा जी… त्वेन जाण नंदा, तैं ऊंचा कैलाश’ और वीरेंद्र सिंह नेगी व सोनम नौगाई का ‘देवी कुरूड़ की देवी, माता कुरूड़ की देवी’ श्रद्धालुओं के बीच खासा लोकप्रिय है। लोग इन गीतों पर छोटे वीडियो और रील बना रहे हैं। वर्ष 2000 की नंदा राजजात के दौरान भी गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के नंदा गीतों ने खूब लोकप्रियता हासिल की थी।

अब शुरू होगी कठिन यात्रा, व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

वाण से आगे बड़ी जात के साथ निर्जन और दुर्गम पड़ावों की कठिन यात्रा शुरू हो गई है। श्रद्धालुओं का कहना है कि अब यात्रा मार्ग पर सुविधाएं सीमित हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां नंदा के भरोसे आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रशासन और संबंधित सरकारी तंत्र को डोलियों, छंतोलियों और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुरक्षा व मूलभूत व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि बड़ी जात सुरक्षित रूप से होमकुंड तक पहुंच सके।

निर्जन पड़ावों में पहुंचने के साथ ही बड़ी जात की असली परीक्षा शुरू मानी जा रही है। श्रद्धालु मां नंदा के जयकारों के साथ कठिन हिमालयी पथ पर आगे बढ़ रहे हैं।

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