
यों ही कोई रजपाल बिष्ट नहीं बन जाता, 45 वर्षों की तपस्या से बनता है जनसरोकारों की पत्रकारिता का हिमालय
ग्राउंड जीरो से संजय चौहान
आज वरिष्ठ पत्रकार रजपाल बिष्ट का जन्मदिन है। इस विशेष अवसर पर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। भगवान बदरीविशाल, भगवान गोपीनाथ और मां नंदा का आशीर्वाद सदैव उन पर बना रहे और वे स्वस्थ एवं दीर्घायु रहें।
यों ही कोई रजपाल बिष्ट नहीं बन जाता। रजपाल बिष्ट बनने के लिए पत्रकारिता की चार दशक से अधिक लंबी तपस्या, संघर्ष, अनुभव और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता चाहिए। साढ़े चार दशकों की उनकी पत्रकारिता वास्तव में जनसरोकारों की पत्रकारिता का एक हिमालय है।
उन्होंने पत्रकारिता को केवल पेशे के रूप में नहीं, बल्कि समाज और पहाड़ की आवाज को सामने लाने के मिशन के रूप में जिया है। पर्यावरण से लेकर संस्कृति, सामाजिक सरोकारों से लेकर सुदूर गांवों की समस्याओं और राजनीतिक गलियारों से लेकर धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियों तक शायद ही कोई ऐसा विषय हो, जिस पर उनकी पैनी नजर न रही हो।
उनकी लेखनी ने बीते 45 वर्षों में पत्रकारिता को नई ऊंचाइयां दी हैं। युवा पत्रकारों के लिए उनका अनुभव किसी शोध संस्थान से कम नहीं। वे सही मायनों में पत्रकारिता के वटवृक्ष हैं, जिसकी छांव में कई पीढ़ियों के पत्रकारों ने पत्रकारिता की बारीकियां सीखी हैं।
मुझे आज भी गर्व है कि मुझे स्वयं रजपाल बिष्ट जी से पत्रकारिता की समझ और उसकी बारीकियां सीखने का अवसर मिला। हर विषय पर उनकी मजबूत पकड़ और खबर की तह तक पहुंचने की उनकी क्षमता उन्हें अन्य पत्रकारों से अलग पहचान देती है।
हिमाचल से उत्तराखंड तक पत्रकारिता को दिलाई नई पहचान
वरिष्ठ पत्रकार रजपाल बिष्ट के पास पत्रकारिता का लंबा और समृद्ध अनुभव है। उन्होंने वर्ष 1982 में स्थानीय समाचार पत्र उत्तरी ध्रुव और देवभूमि से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद नवभारत टाइम्स, जनसत्ता, अमर उजाला, दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा, पर्वतजन और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों के जरिए जनसरोकारों की पत्रकारिता के मिशन को आगे बढ़ाया।
हिमाचल से लेकर उत्तराखंड तक उन्होंने अपनी बेबाक और तथ्यपरक पत्रकारिता की अलग पहचान बनाई। वर्तमान में गोपेश्वर में रहकर वे दैनिक भास्कर और उत्तरी ध्रुव डिजिटल के माध्यम से पत्रकारिता को नई दिशा देने में जुटे हैं।
आपदाओं में ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग
रजपाल बिष्ट की पत्रकारिता की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है—ग्राउंड जीरो से खबर जुटाने का जुनून।
उत्तरकाशी भूकंप, चमोली भूकंप और विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के दौरान उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में मौके पर पहुंचकर रिपोर्टिंग की। वर्ष 1991 में उत्तरकाशी भूकंप के दौरान नवभारत टाइम्स ने उन्हें गोपेश्वर से उत्तरकाशी की रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी सौंपी थी।
संचार के आज जैसे आधुनिक साधन उस समय उपलब्ध नहीं थे। इसके बावजूद वे दिनभर भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में घूमकर सूचनाएं जुटाते और नयी टिहरी पहुंचकर फैक्स के माध्यम से खबरें भेजते थे। अगले दिन उनकी खबर अखबार में प्रकाशित होती थी।
उनकी खबरों की विश्वसनीयता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उत्तरकाशी भूकंप से संबंधित उनकी खबरों को आकाशवाणी के समाचार प्रसारण में भी पढ़ा जाता था। यह सिलसिला लगातार कई दिनों तक जारी रहा।
चमोली भूकंप से लेकर विभिन्न आपदाओं तक उनकी धरातलीय रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की प्रमाणिकता और प्रतिबद्धता की मिसाल रही है।
लेखों में पर्यावरण की चिंता
चार दशक से अधिक की पत्रकारिता में रजपाल बिष्ट ने जल, जंगल और जमीन के सवालों पर हजारों लेख लिखे। उनके लेखों में पहाड़ और पर्यावरण के प्रति चिंता स्पष्ट दिखाई देती है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों को लगातार प्रमुखता दी। प्रसिद्ध चिपको आंदोलन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े जन आंदोलनों को अपनी लेखनी के माध्यम से व्यापक पहचान दिलाने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
उनकी पत्रकारिता का मूल उद्देश्य केवल खबर प्रकाशित करना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करना भी रहा है।
पहाड़ और रजपाल बिष्ट एक-दूसरे के पूरक
रजपाल बिष्ट और पहाड़ की पत्रकारिता को अलग करके देखना मुश्किल है। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से पहाड़ की पीड़ा, संघर्ष और संभावनाओं को देश-दुनिया के सामने रखा।
सीमांत जनपद चमोली में रहकर भी उनकी खबरों की गूंज देश की राजधानी तक सुनाई देती रही है। चारधाम यात्रा हो या नंदा की जात, पृथक राज्य आंदोलन हो या शराब विरोधी जन आंदोलन, सीमांत नीती घाटी की समस्याएं हों या देवाल ब्लॉक के दूरस्थ गांवों की आवाज—उन्होंने हर विषय को गंभीरता से उठाया।
पर्यटन, लोकसंस्कृति, राजनीति, धार्मिक परंपराएं, सामाजिक सरोकार और युवाओं की प्रतिभाएं—उनकी पत्रकारिता का दायरा बेहद व्यापक रहा है। उन्होंने प्रतिभाओं को अपनी लेखनी के माध्यम से मंच देने का भी काम किया।
बेजोड़ पत्रकारिता के लिए दर्जनों सम्मान
45 वर्षों की पत्रकारिता यात्रा में रजपाल बिष्ट को उनकी बेजोड़ पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के लिए अनेक पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
उन्हें यूथ आइकॉन पुरस्कार, वरिष्ठ नागरिक मंच सम्मान, गौरा देवी पुरस्कार, मैती सम्मान, पं. गोविंद प्रसाद नौटियाल पत्रकार सम्मान, योगेश्वर प्रसाद शास्त्री सम्मान और बंड गौरव सम्मान सहित अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
ये सम्मान केवल रजपाल बिष्ट का सम्मान नहीं हैं, बल्कि जनसरोकारों और प्रतिबद्ध पत्रकारिता के प्रति समाज के सम्मान का प्रतीक हैं।
आज के दौर में पत्रकार बनना आसान, रजपाल बिष्ट बनना नहीं
आज के दौर में पत्रकार बनना शायद पहले से आसान हो गया है। हाथ में मोबाइल और माइक लेकर कोई भी खुद को पत्रकार कह सकता है। लेकिन रजपाल बिष्ट जैसा पत्रकार बनने के लिए सिर्फ कैमरा और माइक नहीं, बल्कि 45 वर्षों का अनुभव, संघर्ष, अध्ययन, संवेदनशीलता और समाज के प्रति प्रतिबद्धता चाहिए।
उनकी पत्रकारिता हमें बताती है कि खबर केवल सूचना नहीं होती, बल्कि उसके पीछे किसी व्यक्ति, गांव, समाज और पूरे पहाड़ की आवाज भी छिपी होती है।
जनसरोकारों की पत्रकारिता के इस हिमालय को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं।
भगवान बदरीविशाल, भगवान गोपीनाथ और मां नंदा से प्रार्थना है कि रजपाल बिष्ट जी को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर लेखनी की शक्ति प्रदान करें।
जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई, रजपाल बिष्ट जी।

