चमोली : गौचर में नाबालिगों के हाथों में वाहन और गलियों में नशे का खेल, पुलिस ने कसी कमर

Team PahadRaftar

चार दोपहिया सीज, दो के चालान; चार ढाबों पर कार्रवाई, सादे कपड़ों में भी निगरानी

केएस असवाल,

गौचर : गौचर नगर क्षेत्र में नाबालिगों के हाथों में दौड़ते दोपहिया वाहन और गली-मोहल्लों में बढ़ती नशे की गतिविधियां अब पुलिस के रडार पर हैं। यातायात नियमों की अनदेखी और नशे के संभावित कारोबार को लेकर पुलिस ने निगरानी और कार्रवाई दोनों तेज कर दी है।

 

पुलिस उपनिरीक्षक मानवेन्द्र गुंसाई के नेतृत्व में संवेदनशील स्थानों, गली-मोहल्लों और ढाबों पर विशेष नजर रखी जा रही है।

पुलिस की कार्रवाई का फोकस सिर्फ सड़क पर वाहन दौड़ाते नाबालिगों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन अभिभावकों और वाहन स्वामियों तक भी पहुंच रहा है, जो अपने नाबालिग बच्चों को वाहन उपलब्ध कराते हैं। इसके लिए पुलिस की एक अलग टीम गठित की गई है। टीम के सदस्य कई स्थानों पर सादे कपड़ों में भी निगरानी कर रहे हैं।

लाउडस्पीकर से अभिभावकों को चेतावनी

पुलिस उपनिरीक्षक मानवेन्द्र गुंसाई पिछले तीन दिनों से लगातार लाउडस्पीकर के माध्यम से अभिभावकों को जागरूक कर रहे हैं। उनका कहना है कि नाबालिग बच्चों को वाहन देना महज यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि उनकी और सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने नाबालिग बच्चों को दोपहिया वाहन न दें। नाबालिग के वाहन चलाते पकड़े जाने पर मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 199ए के तहत अभिभावक या वाहन स्वामी के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। पुलिस ने साफ संकेत दिया है कि नियम तोड़ने वालों को अब किसी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी।

गुरुवार की कार्रवाई ने बढ़ाई सख्ती

गुरुवार को पुलिस ने नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने और यातायात नियमों के उल्लंघन के मामलों में चार दोपहिया वाहन सीज किए। दो वाहनों के चालान किए गए। वहीं, दो मामलों में वाहन स्वामियों और अभिभावकों के खिलाफ न्यायालय में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।

पुलिस की इस कार्रवाई से उन अभिभावकों के लिए भी संदेश साफ है, जो कम उम्र में बच्चों के हाथों में दोपहिया वाहन थमा देते हैं।

ढाबों से लेकर गली-मोहल्लों तक नजर

गौचर में नशे के खिलाफ भी पुलिस ने अपना अभियान तेज किया है। अभियान के तहत चार ढाबों के चालान किए गए हैं। इसके अलावा गली-मोहल्लों में संचालित दुकानों पर भी नजर रखी जा रही है। पुलिस को अवैध रूप से शराब अथवा अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री की शिकायतें मिलने पर संबंधित स्थानों की जांच और कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस की निगरानी का मकसद उन स्थानों की पहचान करना भी है, जहां युवाओं और नाबालिगों के जुटने की आशंका रहती है। सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

सवाल सिर्फ चालान का नहीं, आने वाली पीढ़ी का

गौचर जैसे तेजी से बढ़ते कस्बाई क्षेत्र में नाबालिगों का वाहन चलाना और युवाओं में नशे की गतिविधियां केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं हैं। यह अभिभावकों, समाज और प्रशासन के लिए भी चिंता का संकेत है। पुलिस की कार्रवाई तत्काल प्रभाव डाल सकती है, लेकिन इन समस्याओं पर स्थायी अंकुश के लिए अभिभावकों और स्थानीय समाज की भागीदारी भी जरूरी होगी।

फिलहाल पुलिस उपनिरीक्षक मानवेन्द्र गुंसाई के नेतृत्व में अभियान जारी है। हेड कांस्टेबल अशोक और हेड कांस्टेबल हरेंद्र समेत पुलिस टीम क्षेत्र में निगरानी और कार्रवाई में जुटी है। पुलिस ने संकेत दिया है कि नाबालिगों को वाहन देने वाले अभिभावकों और नशे की गतिविधियों में संलिप्त लोगों पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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