चमोली : भलि केन जाया गौरा तू अपणा कैलाश., नंदा की विदाई में छलके आंसू, बारिश पर भारी आस्था

Team PahadRaftar

चमोली, संवाददाता। ‘भलि केन जाया गौरा तू अपणा कैलाश, शीलि ध्याण तू जशीलि व्हे रेई… अपणा मैत्यों पर छत्र-छाया बणाई रेई…।’ पारंपरिक लोकगीतों और जागरों की गूंज के बीच सोमवार को बंड पट्टी में मां नंदा की डोली को मायके से विदाई दी गई। बाटुला गांव में विदाई के दौरान भावुक दृश्य देखने को मिले। मां नंदा को विदा करते समय महिलाओं और ध्याणियों की आंखों से आंसू छलक पड़े। कई ध्याणियां फफक-फफक कर रो पड़ीं।

12 साल के लंबे इंतजार के बाद पहाड़ में मां नंदा की यात्रा शुरू होने से गांव-गांव उत्सव का माहौल है। भारी बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं है। गाड़-गदेरों और दुर्गम पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए श्रद्धालु मां नंदा की डोलियों के साथ अपने पड़ावों की ओर बढ़ रहे हैं।

बाटुला से लुंहा-दिगोली पहुंची बंड नंदा की डोली

बंड की नंदा की डोली सोमवार को बाटुला गांव से श्रीकोट होते हुए रात्रि विश्राम के लिए लुंहा-दिगोली पहुंची। इस दौरान जगह-जगह ग्रामीणों ने डोली का स्वागत किया और मां नंदा से क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

तीनों डोलियां अपने-अपने पड़ावों की ओर बढ़ीं

मां राजराजेश्वरी बधाण की नंदा डोली मथकोट से उस्तोली की ओर रवाना हुई। वहीं कुरुड़ दशोली की नंदा डोली लुणतरा से रात्रि विश्राम के लिए काण्डई गांव पहुंची। तीनों डोलियों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु चल रहे हैं।

बारिश भी नहीं डिगा सकी आस्था

मानसून अपने अंतिम दौर में है, लेकिन पहाड़ों में बारिश का सिलसिला जारी है। कई स्थानों पर गाड़-गदेरे उफान पर हैं और रास्ते भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। इसके बावजूद मां नंदा के प्रति आस्था श्रद्धालुओं को आगे बढ़ा रही है। बारिश में भी लोग डोली के साथ पैदल यात्रा कर रहे हैं।

मां नंदा को पहाड़ की ध्याण माना जाता है। मायके से कैलास की ओर विदाई के दौरान लोकगीतों में ध्याणियों का दर्द और मां नंदा के प्रति अगाध श्रद्धा साफ झलक रही है। जगह-जगह ‘जय नंदा’ के जयकारों और जागरों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।

गांव-गांव नंदामय हुआ पहाड़

12 वर्ष बाद मां नंदा की यात्रा ने बंड, दशोली और बधाण परगनों के साथ पूरे पहाड़ को नंदामय कर दिया है। गांवों में घर-घर उत्सव का माहौल है। अपनी ध्याण को विदा करने के लिए हर कोई पहुंच रहा है। विदाई की बेला में आंखों में आंसू हैं तो मां नंदा के आशीर्वाद और छत्र-छाया की कामना के साथ दिल में आस्था भी उतनी ही गहरी है।

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