
25 साल बाद चोपता-फलासी में महा बन्याथ, वेद ऋचाओं से गुंजायमान हुआ क्षेत्र
‘गढ़ ईश्वरी’ पुस्तक का लोकार्पण, आस्था का अद्भुत संगम
लक्ष्मण नेगी
ऊखीमठ। तल्लानागपुर के चोपता-फलासी स्थित भगवती चण्डिका की पावन तपस्थली इन दिनों भक्ति और आस्था का केंद्र बनी हुई है। 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित नौ दिवसीय महा बन्याथ से पूरा क्षेत्र वेद ऋचाओं, मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठानों से गुंजायमान है। दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बन रहे हैं।

महा बन्याथ के दौरान विद्वान आचार्यों की देखरेख में विधिवत यज्ञ अनुष्ठान संपन्न कराए जा रहे हैं। सुबह से शाम तक चल रहे कार्यक्रमों में वेद मंत्रों की गूंज से तल्लानागपुर क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय हो गया है। श्रद्धालु यज्ञ में आहुतियां देकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना कर रहे हैं।
तीसरे दिन विशेष धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत साहित्यकार बलदीप बर्त्वाल की पुस्तक ‘गढ़ ईश्वरी’ का भव्य लोकार्पण किया गया। श्रद्धालुओं के अनुसार यह लोकार्पण भगवती चण्डिका की दिव्य उपस्थिति में संपन्न हुआ, जिसने कार्यक्रम को और भी अलौकिक बना दिया। पुस्तक में भगवती चण्डिका की महिमा, लोक आस्था और धार्मिक परंपराओं का विस्तृत वर्णन किया गया है, जिसे स्थानीय संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

इस अवसर पर तुंगेश्वर महादेव मंदिर समिति के अध्यक्ष मानवेन्द्र बर्त्वाल ने इसे सराहनीय प्रयास बताया, जबकि ग्राम प्रधान हेमा देवी ने लेखक के कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा की। महा बन्याथ में क्षेत्रीय महिलाओं द्वारा भजन-कीर्तन की प्रस्तुति से वातावरण और अधिक भक्तिमय हो उठा है। तीसरे दिन कोल्लू-भन्नू निवासी रघुवीर सिंह सजवाण एवं श्रीमती उमा सजवाण ने श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था की।
मंदिर समिति प्रबंधक कल्याण सिंह नेगी ने बताया कि 25 वर्षों बाद इस भव्य आयोजन से क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं को नई ऊर्जा मिली है। इससे युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और आस्था से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। समापन तक और अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
मौके पर समिति सचिव पूर्ण सिंह खत्री, सह सचिव मगन सिंह नेगी, उपाध्यक्ष दलवीर सिंह राणा, कोषाध्यक्ष यशवन्त सिंह नेगी समेत अनेक जनप्रतिनिधि, आचार्य और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।
