
केएस असवाल ऊखीमठ : तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली शनिवार को अंतिम रात्रि प्रवास के लिए भनकुण्ड पहुंच गई। रविवार को डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंचेगी। इसके साथ ही नौ नवंबर से यहां भगवान तुंगनाथ की शीतकालीन पूजा शुरू हो जाएगी।
शनिवार सुबह चोपता में विद्वान आचार्यों ने ब्रह्म बेला में पंचांग पूजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर भगवान तुंगनाथ और 33 कोटि देवी-देवताओं का आह्वान किया। इसके बाद सुबह आठ बजे भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली भनकुण्ड के लिए रवाना हुई।
डोली के दुगलविट्टा पहुंचने पर लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता मुकेश परमार और विभाग से सेवानिवृत्त पौड़ी निवासी नारायण दत्त जुयाल के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने पुष्प और अक्षतों से भव्य स्वागत किया। इस दौरान भंडारे का आयोजन भी किया गया। डोली ने मक्कू बैंड, हूण्डू और बनतोली सहित विभिन्न यात्रा पड़ावों का भ्रमण किया। जगह-जगह ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने डोली पर लाल-पीले वस्त्र अर्पित कर मनौतियां मांगीं। साथ ही पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
मंदिर प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने बताया कि डोली यात्रा को लेकर विभिन्न गांवों में श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। रविवार को भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली विधि-विधान के साथ मक्कूमठ स्थित शीतकालीन गद्दीस्थल में विराजमान होगी। इसके बाद शीतकाल के छह माह तक श्रद्धालु मक्कूमठ में ही भगवान तुंगनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
इस मौके पर अतुल मैठाणी, दयाल सिंह, राजेंद्र सिंह, राम सिंह, चंद्रमोहन बजवाल, आनंद सिंह रावत, उमेद सिंह नेगी, नरेंद्र भंडारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

