बधाण की नंदा डोली से दशोली-बंड व ज्वाल्पा देवी की डोलियों का हुआ मिलन, 15 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे
थराली/देवाल। बधाण परगना की श्री राजराजेश्वरी नंदा देवी की लोकजात यात्रा बुधवार देर शाम लाटू धाम वाण पहुंची। यहां बधाण की नंदा डोली का दशोली-बंड की नंदा डोलियों, ज्वाल्पा देवी की डोली और छंतोलियों से भावपूर्ण मिलन हुआ। डोलियों के मिलन के दौरान वाण में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। देर रात तक मां नंदा के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा।
बधाण की नंदा डोली अपने 12वें पड़ाव मंदोली से लोहाजंग और कर्जाबगड़ होते हुए वाण पहुंची। दशोली-बंड और ज्वाल्पा देवी की डोलियां पहले ही वाण की सीमा में पहुंच गई थीं। बधाण की डोली के देवी चौक पहुंचते ही सभी डोलियां और छंतोलियां एक साथ पहुंचीं। इस दौरान कई श्रद्धालुओं पर देवी अवतरित हुईं और वे काफी देर तक नृत्य करते रहे।
वाण में 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। नंदा भक्तों के साथ जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी यहां मौजूद रहे। थराली विधायक भूपाल राम टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, राज्य मंत्री बलवीर घुनियाल, मुख्यमंत्री समन्वयक दलवीर दानू, जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार समेत कई लोग यात्रा में शामिल हुए।
लाटू देवता मंदिर समिति के अध्यक्ष कृष्णा बिष्ट, ग्राम प्रधान नंदुली बिष्ट और ग्रामीणों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
आज गैरोलीपातल पहुंचेगी यात्रा
गुरुवार को लाटू देवता मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद देव यात्रा लाटू देवता के निशान की अगुआई में रणकाधार और नीलगंगा होते हुए निर्जन पड़ाव गैरोलीपातल पहुंचेगी। इसके बाद यात्रा वेदनी बुग्याल के लिए रवाना होगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले ही वेदनी बुग्याल पहुंच चुके हैं और देव यात्रा के इंतजार में डटे हैं।
मंदोली में पहली बार रुकी नंदा की डोली
लोकजात यात्रा के दौरान नंदा देवी की उत्सव डोली पहली बार द्यौसिंह देवता की जन्मभूमि मंदोली में कुछ समय के लिए रुकी। यहां श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर मनौतियां मांगीं। लाटू क्षेत्र के धावक एवं मंदोली निवासी कलम सिंह बिष्ट ने बताया कि द्यौसिंह देवता लाटू देवता की तरह मां नंदा की यात्रा की अगुआई करते हैं। ग्रामीणों के प्रयास से पहली बार जन्मभूमि में नंदा डोली को रोककर पूजा-अर्चना की गई।

