
15 वर्षों बाद मंगलवार को बाबा केदार से होगा भगवती कालीमाई का दिव्य मिलन, ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनेंगे हजारों श्रद्धालु
ऊखीमठ। भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा सोमवार को शिव-पार्वती विवाह स्थल त्रियुगीनारायण से भावुक क्षणों के बीच विदा होकर गौरीकुंड पहुंची। त्रियुगीनारायण में देवी की विदाई के दौरान श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। वहीं, गौरीकुंड पहुंचने पर ग्रामीणों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर मां कालीमाई का भव्य स्वागत किया। देवी के जयकारों और ढोल-दमाऊं की गूंज से पूरी केदारघाटी भक्तिमय हो उठी।

त्रियुगीनारायण में दिवारा यात्रा के पहुंचने से लेकर विदाई तक श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा। लोगों ने भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र विवाह स्थल के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। परंपरागत विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं ने मां कालीमाई से लोकमंगल का आशीर्वाद मांगा।
गौरीकुंड पहुंचते ही स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों ने मां के स्वागत में पलक-पांवड़े बिछा दिए। पुष्पवर्षा के बीच देवी का अभिनंदन किया गया। महिलाओं ने पारंपरिक मंगलगीत गाए और श्रद्धालु मां के जयकारे लगाते हुए यात्रा के साथ चलते रहे।
15 वर्षों बाद होगा बाबा केदार और मां कालीमाई का मिलन
मंगलवार का दिन दिवारा यात्रा के लिए ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भगवती कालीमाई और बाबा केदार का दिव्य मिलन होगा। इस ऐतिहासिक क्षण को लेकर केदारघाटी में श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। बड़ी संख्या में ग्रामीण और देश-विदेश से आए श्रद्धालु इस पावन मिलन के साक्षी बनने के लिए पहुंच रहे हैं।
दिवारा यात्रा समिति अध्यक्ष लखपत राणा ने बताया कि उत्तराखंड में देवी-देवताओं की दिवारा यात्राएं लोक आस्था और समृद्ध धार्मिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं। इन यात्राओं के दौरान देवी अपने मूल धाम से निकलकर विभिन्न गांवों, तीर्थस्थलों और देवस्थानों का भ्रमण कर भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं। कालीमाई की दिवारा यात्रा भी इसी लोकपरंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति है।
हर पड़ाव पर उमड़ रहा आस्था का सैलाब
समिति महामंत्री सुरेशानंद गौड़ ने बताया कि यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। ग्रामीण पारंपरिक परिधानों में देवी के स्वागत के लिए पहुंच रहे हैं। घरों के आंगन से लेकर मंदिर परिसरों तक भक्ति का माहौल बना हुआ है।
यात्रा प्रभारी प्रकाश पुरोहित ने बताया कि मंगलवार को होने वाले कालीमाई और बाबा केदार के मिलन को लेकर क्षेत्रवासियों में विशेष उल्लास है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह मिलन केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि क्षेत्र की सामूहिक चेतना, लोकविश्वास और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है।
इस मौके पर प्रधान रुचि गैरोला, क्षेत्र पंचायत सदस्य सुमन तिवारी, मठापति परशुराम गैरोला, विजय प्रसाद शर्मा, सचिदानंद पंचपुरी, गिरिजाशंकर भट्ट, पंडित सतीश गौड़, शिवम भट्ट, ऋषिराज भट्ट, हरीश गौड़, राकेश राणा, रतन सिंह राणा, योगेंद्र सिंह राणा, कुंवर सिंह राणा, केदार सिंह राणा, संदीप राणा, दलीप असवाल, रजपाल सिंह, कुलदीप सिंह रावत सहित त्रियुगीनारायण व गौरीकुंड के जनप्रतिनिधि, ग्रामीण और देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु मौजूद रहे।

