चमोली : रम्माण की मुखौटा कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल, 24 छात्र-छात्राएं सीखेंगे हुनर

Team PahadRaftar

संजय कुंवर गोपेश्वर। जोशीमठ ब्लॉक के सलूड़-डुंग्रा में विश्व सांस्कृतिक धरोहर रम्माण की पारंपरिक मुखौटा निर्माण कला को संरक्षित करने की पहल शुरू हो गई है। बुधवार को क्षेत्रपाल देवता मंदिर परिसर में रम्माण मुखौटा निर्माण प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। उत्तराखंड विधानसभा के अंतरराष्ट्रीय संसदीय अध्ययन, शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में क्षेत्र के 24 छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण ले रहे हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण की पहल पर शुरू हुए इस प्रशिक्षण का उद्देश्य रम्माण की सदियों पुरानी मुखौटा निर्माण कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ युवाओं में सृजनात्मक कौशल विकसित करना है। मास्टर ट्रेनर मोहन लाल चार माह तक प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद विधानसभा की ओर से नामित विशेषज्ञ प्रतिभागियों का मूल्यांकन करेंगे।

सफल प्रतिभागियों को मिलेगा मानदेय और टूल किट

मूल्यांकन में सफल प्रतिभागियों को सात हजार रुपये प्रतिमाह की दर से कुल 28 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। इसके अलावा उन्हें टूल किट और प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद युवा कलाकार स्वयं रम्माण के पारंपरिक मुखौटों का निर्माण कर इस कला को आगे बढ़ाने के साथ इसे रोजगार का माध्यम भी बना सकेंगे।

दूसरे चरण में अन्य लोगों को भी मिलेगा प्रशिक्षण

कार्यशाला के दूसरे चरण में क्षेत्र के अन्य इच्छुक लोगों को भी मुखौटा निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए आवश्यक काष्ठ और प्रशिक्षक के मानदेय की व्यवस्था विधानसभा की ओर से की जाएगी।

रम्माण संयोजक डॉ. कुशल भंडारी ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष 16 नवंबर को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष मुखौटा निर्माण कार्यशाला का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद इस दिशा में पहल शुरू हुई। उद्घाटन अवसर पर विधानसभा के अनुभाग अधिकारी राकेश चंद्र रमोला और समीक्षा अधिकारी अंशुमान काला ने टूल किट, बैनर सहित अन्य सामग्री उपलब्ध कराई।

इस मौके पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य भरत सिंह कुंवर, सलूड़ प्रधान सुनीता देवी, डुंग्रा प्रधान रीना, भरत सिंह पंवार, रम्माण समिति अध्यक्ष शरत सिंह रावत समेत कई लोग मौजूद रहे। संचालन डॉ. कुशल भंडारी ने किया।

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