
पिंडरघाटी का जनजीवन ठप, तीन ब्लॉकों की बिजली गुल, जरूरी सामान की आपूर्ति भी थमी!
केएस असवाल नारायणबगड़। पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश अब जनजीवन पर भारी पड़ने लगी है। बुधवार रात हुई मूसलाधार बारिश के दौरान आमसौड़ में पहाड़ी का बड़ा हिस्सा दरक गया और भारी मात्रा में बोल्डर व मलबा सिमली-ग्वालदम राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गिरा। देखते ही देखते करीब 150 मीटर से अधिक सड़क मलबे से पट गई। हालात ऐसे बने कि सड़क पर पैदल चलने तक की जगह नहीं बची और राजमार्ग पूरी तरह बंद हो गया।
हाईवे बंद होने से दोनों ओर यात्री, स्थानीय लोग और मालवाहक वाहन घंटों तक फंसे रहे। सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को हुई, जिन्हें जरूरी कार्यों के लिए घाटी से बाहर जाना था। कई यात्रियों को रात और दिन सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ा।
बारिश का असर केवल सड़क तक सीमित नहीं रहा। भूस्खलन की चपेट में आकर 33 केवी हाईटेंशन बिजली लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे थराली, देवाल और नारायणबगड़ विकासखंडों की विद्युत आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। बिजली नहीं होने से सरकारी कार्यालयों और बैंकिंग सेवाओं पर भी असर पड़ा। कई क्षेत्रों में इंटरनेट और संचार सेवाएं भी प्रभावित रहीं।
राजमार्ग बंद होने का सीधा असर आम लोगों की दिनचर्या पर पड़ा। पिंडरघाटी के बाजारों तक दूध, फल, सब्जियां, अखबार और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति नहीं हो सकी। लगातार हो रही बारिश के कारण गुरुवार को अधिकांश बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित रहीं।
उधर, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की टीमें गुरुवार सुबह से ही राजमार्ग खोलने के अभियान में जुट गईं। दोनों ओर से जेसीबी और अन्य भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य शुरू किया गया। हालांकि लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में बाधा बन रही है और ऊपर से पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है।
बीआरओ के अभियंता आर.के. सिंह ने बताया कि राजमार्ग के दोनों छोर से मलबा हटाने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। मौसम अनुकूल रहा तो रात तक यातायात बहाल करने का प्रयास किया जाएगा।
वहीं, ऊर्जा निगम की टीम भी क्षतिग्रस्त 33 केवी लाइन की मरम्मत में जुटी रही। पावर कॉरपोरेशन के कनिष्ठ अभियंता हेमंत चमोला ने बताया कि विद्युत आपूर्ति बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है और लाइन ठीक होते ही प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन और वैकल्पिक व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि सड़क, बिजली और आवश्यक सेवाओं के बाधित होने पर आम लोगों को कम से कम परेशानी उठानी पड़े।
